स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री से मिले पीएम मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के विदेश दौरे के दूसरे चरण में रविवार देर रात स्लोवाकिया पहुंचे। राजधानी ब्रातिस्लावा में उनका स्वागत स्लोवाकिया के विदेश एवं यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराय ब्लानार ने किया। प्रधानमंत्री 16 जून तक स्लोवाकिया में रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
ब्रातिस्लावा पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच ब्रातिस्लावा कैसल में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकियाई प्रधानमंत्री को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।
स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्हें यहां की परंपरा के अनुसार ब्रेड और नमक भेंट किया गया, जो सम्मान, मित्रता और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया।
प्रधानमंत्री मोदी 13 जून से फ्रांस और स्लोवाकिया की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। दौरे के अगले चरण में वे 17 जून को फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात होने की संभावना है, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हो सकते हैं।
स्लोवाकिया में भारतीय समुदाय की मजबूत मौजूदगी
स्लोवाकिया में वर्तमान समय में नौ हजार से अधिक भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या आईटी सेवाओं, तकनीकी विकास केंद्रों और इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़ी है। स्लोवाकिया शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण यहां रहने वाले भारतीयों को एक ही वीजा के माध्यम से यूरोप के 26 देशों में यात्रा की सुविधा मिलती है।
व्यापारिक रिश्तों में लगातार बढ़ोतरी
भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच करीब 17 हजार करोड़ रुपए का व्यापार दर्ज किया गया। भारत ने स्लोवाकिया को लगभग 14,500 करोड़ रुपए के उत्पादों का निर्यात किया, जिनमें ऑटो पार्ट्स, मोबाइल फोन, टेक्सटाइल और अन्य औद्योगिक सामान शामिल रहे।
स्लोवाकिया ऑटोमोबाइल निर्माण के लिए यूरोप के प्रमुख देशों में गिना जाता है। यहां हर साल 10 लाख से अधिक यात्री वाहनों का उत्पादन होता है। वोक्सवैगन, किआ, जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसी कंपनियों की उत्पादन इकाइयां यहां मौजूद हैं। देश की जीडीपी में ऑटो सेक्टर का योगदान लगभग 14 प्रतिशत है।
भारत स्लोवाकिया से वाहन, औद्योगिक मशीनें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्रोसेस्ड रबर जैसे उत्पाद आयात करता है। वहीं स्लोवाकिया में श्रमशक्ति की कमी के कारण विदेशी कामगारों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
फ्रांस में मोदी-मैक्रों की अहम बैठक, 13 समझौतों पर सहमति
स्लोवाकिया पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के नीस शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे।
दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा के दौरान रक्षा, व्यापार, शिक्षा, अंतरिक्ष और उन्नत तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए हाई लेवल मैकेनिज्म और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का निर्णय लिया गया।
‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक और वेंचर कैपिटल फंड शामिल हुए।
कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी को नीस के समीप स्थित ऐतिहासिक विला केरीलोस लेकर गए। यह फ्रांस की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। दोनों नेताओं ने यहां समय बिताया और मैक्रों ने प्रधानमंत्री के साथ ली गई तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कही ये प्रमुख बातें
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा मूल्यों और पारस्परिक विश्वास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम भारतीय प्रतिभा और यूरोपीय निवेश के बीच मजबूत सेतु का काम करेगा। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान समय में दो लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसी उभरती तकनीकें आने वाले समय में दुनिया का भविष्य तय करेंगी। उन्होंने भारतीय युवाओं को नवाचार और समस्या समाधान की दिशा में अग्रणी बताया।
मैक्रों ने भारत की तकनीकी क्षमता की सराहना की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि भारत आज वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत हर साल इतनी बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है, जो यूरोप और अमेरिका की संयुक्त संख्या के बराबर है।
मैक्रों ने कहा कि दुनिया अब भारत के साथ मिलकर इनोवेशन करना चाहती है। उन्होंने खुली और सहयोगी एआई प्रणाली के समर्थन की भी बात कही। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को लंबे समय तक देश का नेतृत्व करने के लिए बधाई देते हुए उनके नेतृत्व की प्रशंसा की।
114 राफेल विमानों की डील पर चर्चा
भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत चाहता है कि इस परियोजना में केवल विमान खरीद ही नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन भी शामिल हो। लगभग सवा तीन लाख करोड़ रुपए के इस प्रस्तावित सौदे में भारत स्थानीय निर्माण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
भारत और फ्रांस मिलकर बना सकते हैं ओपन-सोर्स AI मॉडल
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस नई पहल की तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में दुनिया में अमेरिकी और चीनी मॉडल प्रमुख हैं, लेकिन दोनों देश मिलकर एक खुला और सहयोग आधारित एआई मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीकी समाधान देने वाला राष्ट्र बन चुका है। वहीं मैक्रों ने भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की डिजिटल दुनिया में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
G7 सम्मेलन में सातवीं बार शामिल होंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित होने वाले G7 सम्मेलन में विशेष आमंत्रित नेता के रूप में हिस्सा लेंगे। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती भूमिका के कारण उसे लगातार आमंत्रित किया जाता रहा है।
मोदी 2019 के बाद से लगातार G7 सम्मेलनों में शामिल होते रहे हैं। इस वर्ष सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार है फ्रांस
फ्रांस लंबे समय से भारत का प्रमुख रक्षा सहयोगी रहा है। पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, तब भी फ्रांस ने भारत के साथ सहयोग जारी रखा था।
फ्रांस वर्तमान में रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। भारत को फ्रांस से मिराज-2000, राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां मिल चुकी हैं। इसके अलावा फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल किए जाने का भी लगातार समर्थन करता रहा है।









