इंदौर-संभाजीनगर को छोड़ गोवा-मुंबई का चुना विकल्प, फूंक दिए निगम के 5 लाख!

ग्रीन वेस्ट से फ्यूल बनाने में बेहतर काम कर रहे शहरों का पार्षदों को तीन-तीन की टीम में करना था दौरा
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देश-प्रदेश की आर्थिक हालत को देखते हुए प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक भले ही अपने खर्च में मितव्ययता बरत रहे हों लेकिन नगर निगम के पार्षद इस पर अमल को तैयार नहीं हैं। हाल ही में उनकी फिजूलखर्ची का उदाहरण सामने आया है। इसमें वेस्ट से फ्यूल और कपड़ा अपशिष्ट निराकरण के लिए दो समितियों को दो अलग-अलग जगह जाना था लेकिन सात पार्षदों का दल एक साथ मुंबई और गोवा घूम आया। खबर यह है कि पुरुष पार्षद अपने साथ पत्नी और महिला पार्षद पति को ले गई थीं। दौरे से लौटने के 8 दिन बाद भी अब तक रिपोर्ट समिट नहीं की गई है।
दरअसल, उज्जैन में निकलने वाले ग्रीन वेस्ट के यूज के लिए प्लांट लगना है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत यह होना है। प्लांट लगाने से पहले बेस्ट प्रैक्टिस देखना जरूरी है। ऐसे में उज्जैन नगर निगम ने दो तरह वेेस्ट के रीयूज के लिए चार जगह में से किन्हीं दो जगह का मुआयना करना तय किया था।
1 ग्रीन वेस्ट फ्यूल- ग्रीन वेस्ट फ्यूल पर इंदौर, गोवा बेहतर काम कर रहे हैं।
2 वेस्ट कपड़ा रीयूज यूनिट- इस मामले में छत्रपति संभाजीनगर और मुंबई बेहतर काम कर रहे है।
निगम परिषद ने तय किया था कि तीन-तीन पार्षदों का दल इन यूनिटों का मुआयना करें और रिपोर्ट समिट करें।
यह लग रहे आरोप
तीन-तीन पार्षदों के दल अलग-अलग जाने थे। पर सात पार्षद एक साथ गए।
ग्रीन वेस्ट फ्यूल पर इंदौर में भी अच्छा काम हो रहा है, ऐसे में गोवा जैसे दूर के स्टेशन का चयन क्यों किया गया?
वेस्ट कपड़े के रीयूज पर छत्रपति संभाजीनगर में अच्छा काम हो रहा है, फिर मुंबई का सिलेक्शन क्यों किया गया?
महिला पार्षदों के साथ उनके पति और पुरुष पार्षदों के साथ पत्नियों के ले जाने का आरोप है। हालांकि तर्क दिया जा रहा है कि पार्षद पति और पार्षद पत्नियों के खर्च का भार निजी तौर पर उठाया गया। पर इसका प्रमाण कोई नहीं दे पा रहा है।
टूर के लिए 5 लाख रुपए एडवांस लिए गए। यह राशि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी छायाप्रसाद दायमा के नाम जारी हुई। दिलचस्प बात यह है कि यह कर्मचारी टूर पर गया ही नहीं।
यह टूर एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) के तहत हुआ, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के बजाय राजस्व विभाग से जुड़े शख्स को प्रभारी बनाकर भेजा गया।
टूर 5 अगस्त को पूरा हो गया, लेकिन अब तक रिपोर्ट समिट नहीं की गई, ना ही खर्च का ब्योरा दिया गया है।
यह देखा दल ने
बी क्विंटिग प्लांट गोवा: यहां ग्रीन वेस्ट से मशीनों की मदद से बॉयो फ्यूल (कोयला) तैयार किया जा रहा है। २७००-३ हजार टन फ्यूल बन रहा है। यह इंडस्ट्रीज में फ्यूल की तरह यूज हो रहा है। इससे कमाई हो रही है।
मुंबई प्लांट- यहां भी खराब कपड़ों को रीसाइकिल किया जा रहा है।
कौन-कौन पार्षद गए थे
- निर्मला करण परमार
- हेमंत गेहलोत
- आशिमा गौरव सेंगर
- दिलीप परमार
- सत्यनारायण चौहान
- जितेंद्र गब्बर कुवाल(कांग्रेस)
- सपना सांखला(कांग्रेस)
गोवा-मुंबई के प्लांटों का मुआयना किया है। यहां की बेस्ट प्रैक्टिस देखी हैं। अफसर जल्दी ही रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस मुताबिक उज्जैन में भी प्लांट लगाने का काम किया जाएगा। पार्षदों के साथ उनका परिवार गया था लेकिन परिवार का खर्च निजी तौर पर वहन किया गया। मैं तो अकेला ही गया था। टूर स्टडी के लिए था।
सत्यनारायण चौहान, प्रभारी स्वास्थ्य समिति उज्जैन नगरनिगम









