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9 स्वागत द्वार से श्रद्धालुओं की होगी अगवानी

2126 सस्ते मकान और 1124 करोड़ के धार्मिक प्रोजेक्ट्स को यूडीए की बैठक में मिली हरी झंडी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ के पहले शहर के प्रमुख ९ मार्गों पर स्वागत द्वार बनाए जाएंगे। जो सिंहस्थ में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत का प्रतीक रहेंगे। इन द्वारों को उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) बनाएगा। शनिवार शाम हुई बैठक में हरी झंडी दी गई है। इनके प्रस्तावित नाम अमृत द्वार, पंचजन्य द्वार, गज द्वार, कालगणना द्वार, उज्जयिनी द्वार, सिंहस्थ द्वार, त्रिशूल द्वार, विक्रमादित्य द्वार, डमरू द्वार तय किए गए हैं।

सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की वर्ष 2026-27 की पहली बैठक अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क व पुल अधोसंरचना, धार्मिक स्थलों के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, नगरीय सौंदर्यीकरण और आवासीय विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को औपचारिक मंजूरी दी गई। वंदे मातरम के साथ संपन्न हुई बैठक में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रवि वर्मा व मुकेश यादव, सदस्यगण (विजय अग्रवाल, अमित श्रीवास्तव, रामागुरू, दुर्गा बिलोटिया, सुशीला जाटव), कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, वनमंडलाधिकारी अनुराग सिंह, सीईओ संदीप सोनी मौजूद थे।

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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनेंगे 2126 नए आवास

शहरी क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस), निम्न (एलआईजी) एवं मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने हेतु प्राधिकरण ने प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 के तहत 2126 आवासीय इकाइयों के निर्माण को स्वीकृति दी है। इसके तहत दो प्रमुख परियोजनाओं पर काम होगा-

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1. टाउन डेवलपमेंट स्कीम (टीडीएस-3 क्षेत्र): लगभग 4.339 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कुल 1346 आवासीय इकाइयों का निर्माण होगा। इसमें 810 मकान 1 बीएचके (ईडब्ल्यूएस), 160 मकान 2 बीएचके, 268 मकान 2.5 बीएचके और 108 इकाइयां 3 बीएचकी की होंगी। इसके अलावा आंतरिक सड़कें, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाएं और लगभग 3790 वर्गमीटर का कमर्शियल एरिया भी विकसित किया जाएगा।

2. नानाखेड़ा परियोजना (पीएम एकता मॉल के सामने): लगभग 1.52 हेक्टेयर क्षेत्र में 780 मकान बनाए जाएंगे जिनमें 468 1.5 बीएचके (ईडब्ल्यूएस) और 312 मकान 2 बीएचके होंगे।

विक्रम नगर के पीछे बनेगा आधुनिक फायर स्टेशन, लॉजिस्टिक हब को मंजूरी

उज्जैन विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की पहली बैठक में आधुनिक फायर स्टेशन के लिए भूमि आवंटन और मास्टर प्लान 2035 के तहत लॉजिस्टिक हब व ट्रांसपोर्ट नगर के विकास को भी आधिकारिक स्वीकृतिप्रदान की गई। शहर के तेजी से हो रहे विस्तार और टीडीएस-03 क्षेत्र के आसपास विकसित हो रहे बड़े आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विक्रम नगर रेलवे स्टेशन के पीछे सोशल इंफ्रा ब्लॉक नंबर-05 में 0.400 हेक्टेयर भूमि आधुनिक फायर स्टेशन की स्थापना के लिए जमीन आवंटित की गई है।

मास्टर प्लान- 2035 के तहत लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट नगर
उज्जैन में यातायात के बेहतर प्रबंधन और सुनियोजित विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मास्टर प्लान 2035 के अंतर्गत लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट नगर के विकास को हरी झंडी दे दी गई है। परियोजना का कुल क्षेत्रफल 81.226 हेक्टेयर है। इस क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से लैस कमर्शियल, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक गतिविधियों का संचालन होगा।

सड़क और परिवहन प्रस्तावों पर भी फोकस

यूडीए बोर्ड ने सिंहस्थ मद के तहत टै्रफिक को सुगम बनाने के लिए कई सड़क और पुल परियोजनाओं के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है।

सिंहस्थ मद के अंतर्गत विभिन्न सड़क पैकेजों (ब्लॉक 1-ए, 1-2, 1-8 तथा ब्लॉक 3 एवं 4) की निविदाओं को स्वीकृति।

शिप्रा नदी के पूर्वी क्षेत्र में 6.1 किलोमीटर लंबी और 9 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण।

अंकपात चौराहे से खाकचौक चौराहे होते हुए मंगलनाथ मार्ग का चौड़ीकरण अब 30 मीटर चौड़ाई में किया जाएगा

देवास रोड को नगर विकास योजनाओं से जोडऩे के लिए विक्रम नगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में रेल ओवर ब्रिज का निर्माण।

टीडीएस-05 एवं टीडीएस-06 क्षेत्रों में सड़कों, पुलियों, यूटिलिटी डक्ट, स्टॉर्म वाटर लाइन, जल वितरण नेटवर्क, सीवर नेटवर्क और स्ट्रीट लाइट जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्यों को हरी झंडी दी गई।

1124 करोड़ रुपए से होगा धार्मिक स्थलों का विकास
अर्बन चैलेंज फंड के तहत इंटीग्रेटेड टेंपल इकोसिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को बैठक में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई। लगभग 1124 करोड़ की लागत से प्रमुख धार्मिक स्थलों का कायाकल्प यूडीए करेगी। इनमें सांदीपनि आश्रम, नवग्रह शनि मंदिर, 84 महादेव क्षेत्र, विराट रूप (पर्यटन एवं पब्लिक एक्सपीरियंस जोन), अंगारेश्वर मंदिर, भोग माता/भूखी माता मंदिर, गढ़कालिका माता मंदिर, सिद्धवट, बगलामुखी माता मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर और श्री कालभैरव मंदिर परिसर के संरक्षण एवं समग्र विकास भी शामिल हैं।

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