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मध्यप्रदेश कांग्रेस में भाजपा की तर्ज पर पीढ़ी परिवर्तन

युवाओं को सौंपे प्रमुख दायित्व

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भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ पर विधानसभा चुनाव हारने की गाज गिर गई है। उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। उनके साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व उपनेता के पदों पर भाजपा की तर्ज पर नई पीढ़ी को लाया गया है। लेकिन इसके साथ ही कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के पुत्रों के भविष्य पर भी प्रश्नचिंह्न लग गया है जिन्हें स्थापित करने में दोनों नेता जी-जान से जुटे थे।

मध्यप्रदेश में हाल के विधानसभा चुनाव का नेतृत्व दो बुजुर्गों-कमलनाथ व दिग्विजय सिंह ने किया। जिनकी उम्र क्रमश: 77 व 76 वर्ष है। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की आयु भी 77 साल है। गोविंद सिंह हाल का चुनाव लहार से हार गए हैं। इनकी जगह अब 50 वर्ष के जीतू पटवारी को नया अध्यक्ष, 46 साल के उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष और 38 वर्ष के हेमंत कटारे को उपनेता बनाया गया है। इस तरह अब नेतृत्व अपेक्षाकृत नए नेताओं के हाथों में सौंप दिया गया है।

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नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने के पीछे भारतीय जनता पार्टी द्वारा हाल में तीन विधानसभाओं के चुनाव में भारी जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री पद पर युवा और नए चेहरों को लाने के बाद बना दबाव था वहीं पार्टी की कमान बुजुर्ग नेताओं के हाथ में होने से बदलावों के प्रति अनिच्छा और निष्क्रियता आड़े आ रही थी। हाल में मप्र में पार्टी को 66 सीटों पर सिमटना पड़ा जबकि पिछले चुनाव में उसके पास 114 सीटें थीं। पार्टी की करारी शिकस्त के बाद कमान इनके हाथों से छीने जाने की मांग की जा रही थी। लेकिन ये पद छोडऩे के प्रति अनमने थे क्योंकि इन्हें अपने पुत्रों को स्थापित करने की चिंता है। कमलनाथ के पुत्र उनकी छिंदवाड़ा सीट से सांसद हैं तो दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं और पिछली कांग्रेस सरकारों में मंत्री रह चुके हैं।

इनके लिए यह विधानसभा चुनाव आखिरी बाजी की तरह था। दिग्विजय सिंह ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में टिक्टों का बंटवारा इसी के मद्देनजर किया था। लेकिन हार ने उनके समीकरण उलट दिए हैं। कमलनाथ को केंद्र में गांधी परिवार के नजदीक माना जाता है। इसलिए उनके दिल्ली जाने की चर्चा भी छिड़ती रही है किंतु हाल की हार ने उनके सभी रास्तों पर अंधेरा बिछा दिया। जीतू पटवारी और सिंघार क्रमश: इंदौर व धार से आते हैं जो मालवा में हैं। इस इलाके में पारंपरिक रूप से भाजपा को बढ़त मिलती है और माना जाता है कि राज्य में पार्टी को सत्ता दिलाने में इस इलाके की बड़ी भूमिका होती है। कांग्रेस द्वारा चुने गए उपनेता कटारे ग्वालियर-चंबल से विधायक हैं। जीतू हाल का विधानसभा चुनाव राऊ से हार गए हैं लेकिन तेजतर्रार नेता है।

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उनके व्यवहार को लेकर अक्सर विवाद भी पैदा होते हैं। 2018 के चुनाव में उनका एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था जिसमें वह यह कहते हुए दिख रहे थे कि कांग्रेस पार्टी गई तेल लेने। सिंघार व कटारे पर चारित्रिक आरोपों के छींटे पड़ चुके हैं।– शिवकुमार विवेक

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