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गर्मी शुरू होते ही जलसंकट की आहट, जलस्तर कम होने से कई स्त्रोत सूखे

1400 हैंडपंप, 400 बोरिंग के भरोसे पीएचई विभाग, अफसर बोले… जरूरत पडऩे पर निजी बोरिंग का होगा अधिग्रहण

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन हर वर्ष की तरह इस साल भी गर्मी शुरू होते ही जलसंकट की आहट सुनाई देने लगी है। हालांकि पीएचई अफसर नर्मदा का पानी लेकर शहर में जलप्रदाय व्यवस्था बनाये रखने की बात कहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि पिछले वर्ष गंभीर डेम का पानी कम होते ही शहर में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय शुरू कर दिया गया था।

शहर में प्रतिदिन 10 एमसीएफटी से अधिक पानी की जलप्रदाय के लिये आवश्यकता होती है। पीएचई के पास गंभीर डेम ही पेयजल सप्लाय का मुख्य स्त्रोत है। इसके अलावा कुछ पानी साहेबखेड़ी तालाब से भी लिया जाता है। इधर शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिलने के कारण पेयजल सप्लाय के लिये पानी का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

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यदि आने वाले दिनों में जलसंकट की स्थिति बनती है तो शहरवासियों को इस साल भी हैंडपंप, बोरिंग के भरोसे ही रहना होगा। पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में शहर में कुल 1500 हैंडपंप हैं जिनमें से 1400 हैंडपंप चालू स्थिति में हैं। इसी प्रकार 300 सिंगल फेस बोरिंग व करीब 96 थ्री फेस बोरिंग अलग-अलग वार्डों में चालू हालत में हैं। पीएचई अफसर बताते हैं कि कलेक्टर द्वारा नए बोरिंग खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसी स्थिति में वार्ड पार्षदों की डिमांड पर नए हैंडपंप, बोरिंग खनन की अनुमति लेना होगी।

निजी बोरिंग का अधिग्रहण भी संभव

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वर्तमान में गंभीर डेम में स्टोर पानी से शहर में प्रतिदिन जलप्रदाय किया जा रहा है। पीएचई अफसरों का दावा है कि शिप्रा नदी में नर्मदा का साफ पानी स्टोर कर लेंगे जिसका उपयोग गऊघाट जलयंत्रालय को पूरी क्षमता से चलाकर जलप्रदाय के लिये किया जायेगा। इसके बाद भी शहर में पेयजल सप्लाय की स्थिति बिगड़ती है तो निजी बोरिंग का अधिग्रहण कर उनका उपयोग जलप्रदाय में किया जा सकता है।

इनका कहना

शहर में पूर्व से लगे हैंडपंप व बोरिंग के संधारण का काम नियमित चल रहा है। इसके अलावा कुएं और बावडिय़ों की सफाई के काम शीघ्र ही शुरू हो जाएंगे। पेयजल संकट की स्थिति में उक्त संसाधनों का उपयोग किया जायेगा।
सुभाष मुवेल, प्रभारी हैंडपंप शाखा पीएचई

यह कुएं, बावड़ी बनेंगे सहारा

जलसंकट के दौरान हर बार की तरह शहर के पुराने कुएं और बावड़ी में स्टोर पानी का उपयोग भी पीएचई द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत संत नगर, मोदी का चौपड़ा, हीरामिल की चाल के 3 कुएं, इंदौर टैक्सटाइल मिल की बावड़ी, पुराने चिमनगंज थाने का कुआ प्रमुख है। उक्त कुओं और बावडिय़ों पर पीएचई द्वारा हाईडेंट लगाकर टैंकर भरे जाते हैं। इस पानी का उपयोग रोड़ पर बनी रोटरियों, उद्यानों और सुलभ काम्पलेक्स में किया जाता है।

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