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नहीं थम रही पार्किंग वालों की मनमानी

बाहर आने वाले श्रद्धालुओं से अधिक शुल्क की वसूली, कई बार बन जाती है विवाद की स्थिति

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन प्रशासन और पुलिस के लाख दावों के बाद भी शहर में पार्किंग संचालकों की मनमानी नहीं थम रही है। खासकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। महाकाल मंदिर से पार्किंग की दूर है और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वाहन मजबूरी में पार्किंग में रखकर जाना होता है और पार्किंग संचालक है कि अपनी मनमनी करते है। मोटा शुल्क वसूलने के बाद भी वाहन और उसके अंदर रखें सामान की सुरक्षा की कोई ग्यारंटी नहीं लेता है। देश-विदेश से महाकाल दर्शन को आ रहे श्रद्धालुओं से वाहन पार्किंग के 6 घंटे के 50 रुपए वसूले जा रहे हैं।

नगर निगम के ठेके पर नृसिंह घाट पार्किंग, चारधाम पार्किंग, शिप्रा नदी छोटा पुल पार्किंग, कार्तिक मेला पार्किंग, हरिफाटक पर वाहन पार्किंग का संचालन हो रहा है। वहां वाहन पार्किंग ठेके की दर का उल्लेख तक नहीं है। ऐसे में श्रद्धालुओं को यह पता ही चल पाता है कि वाहन पार्किंग का शुल्क कितना निर्धारित है। समय अवधि का कोई उल्लेख भी पार्किंग स्थल पर नहीं किया गया है। यानी कितने समय का कितना पार्किंग शुल्क चुकाना पड़ेगा।

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ना नियम-कायदा और ना ही रसीद की कोई ग्यारंटी

यदि कोई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ यदि एक दिन भी यहां व्यतीत करता है तो उसे 200 रुपए तो पार्किंग शुल्क ही देना पड़ रहा है। इसके अलावा मंदिर से 500 मीटर दूर या एक किलोमीटर पहले ही पार्किंग पर वाहन रोक दिए जाते हैं। खुद के वाहन होने के बावजूद भी निकट पार्किंग न होने के कारण श्रद्धालुओं को अपना वाहन अधिक शुल्क चुकाकर दूर रखना पड़ता है और वृद्धजन, नि:शक्तजन आदि के लिए ई-रिक्शा करके ही श्री महाकाल लोक व महाकाल मंदिर पहुंचना पड़ता है। ऐसे में उन्हें दोहरा शुल्क चुकाना पड़ रहा है।

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