रात में देखकर चलें, धीरे चले, नगर निगम की लापरवाही के गड्ढे विकलांग कर देंगे

लापरवाही: शहर की कोई सड़क ऐसी नहीं जहां जानलेवा गड्ढे न हों
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5 दर्जन पार्षद, 2 दर्जन अधिकारी, 10 दर्जन कर्मचारी, किसी को नजर नहीं आ रहे गड्ढे
उज्जैन। रात में आप वाहन से जाएं तो शहर के कुछ इलाकों में सावधानी बरतें। नगर निगम की लापरवाही वाले गड्डे आपको विकलांग बना कर जीवन भर का दु:ख दे सकते हैं। यह सलाह या नसीहत नहीं है। तथ्यों से लबरेज ऐसी सच्चाई है जिसे शहर के लोग तो जानते हैं, पार्षद और अधिकारी शायद नहीं जानते। कई लोग ऐसे भी हैं जो इन गड्ढों से चोटिल हुए हैं। अगर अधिकारियों ने यह तय कर लिया है कि जनता की नहीं सुनेंगे तो कम से कम पार्षदों को तो सुनना चाहिए।
आइए, आपको ऐसे गड्ढे दिखाते हैं जिन्हें देख कर आप हैरान रह जाएंगे। हो सकता है कि आपका इन गड्ढों से वास्ता न पड़ा हो, आप खुशनसीब हैं। बदनसीब वे लोग हैं जिन्हें इन गड्ढों ने अपना शिकार बनाया है। कुछ तो आज भी खजूर वाली मस्जिद के आसपास जाकर देसी पट्टा बंधवा रहे हैं। कुछ की हालत तो ऐसी हो गई कि सोनोग्राफी कराना पड़ी और आज भी इलाजरत हैं। चोटिल लोग यही कहते हैं, दिया लिया आड़े आ गया, इतने पर ही उतरी, जान बच गई। बाबा महाकाल, इन गड्ढों से बचाए। कोई और घायल न हो।
मक्सी रोड एमपीईबी ऑफिस के सामने
जब आप मक्सी रोड जाएंगे तो बीच में एमपीईबी का ऑफिस आएगा। यहीं पर आपको गड्डा नजर आएगा। गनीमत है कि कुछ भले लोगों ने इसे उस बैरिकेड्स से ढंक दिया है जो शहर में चारों तरफ बिखरे पड़े हैं। हालांकि यह गड्डा मक्सी रोड पर ही रहने वाले कई लोगों को घायल कर चुका है। इसी रोड पर मयखाना है। पीने वाले इधर से निकलते हैं। संतुलन बिगड़ता है और वे बैरिकेड्स से टकरा जाते हैं।
जरा इनकी भी सुन लीजिए
इंदिरा नगर में रहने वाले देवेंद्र दुबे का कहना है कि वे रात में रेलवे स्टेशन की तरफ बाइक से जा रहे थे। कोयला फाटक के गड्ढे में कार का अगला पहिला फंस गया। गनीमत है, कार पलटी नहीं। मक्सी रोड निवासी यतींद्र कुमार इस मार्ग के गड्ढे के शिकार हुए। कार्तिक चौक में रहने वाले संजय दुबे टंकी चौक पर खुले चेंबर के कारण चोटिल हुए।
आयुक्त से संपर्क नहीं
शहर में हो रहे भयावह गड्डों को लेकर अक्षरविश्व ने नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक से चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इन गड्ढों को भरवाने के लिए आयुक्त को ही देना है। अब देखना है कि इस खबर के बाद आयुक्त को शहर के गड्ढे दिखाई देते हैं या नहीं।
अंदर की कहानी: दरअसल यह पूरी लड़ाई नगरनिगम के हाउस रो ठेके को लेकर चल रही है। पहले इस ठेके का पेटी कांटेक्ट पुराने शहर के एक राजनेता के खास के पास था। प्रदेश में परिवर्तन के बाद अब यह ठेका दूसरे पक्ष के पास चला गया है। एक पक्ष मानता है कि गब्बर भाटी ने यह ठेका दूसरे पक्ष को दिलाया है और इसे लेकर आपसी विवाद चल रहे हैं।










