3 घंटे में 7 प्रोटोकॉल पर केवल 30 श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए

प्रोटोकॉल दर्शनार्थियों की संख्या में भारी कमी
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उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कांड का खुलासा होने का असर प्रोटोकॉल दर्शनार्थियों की संख्या में अब साफ दिखाई देने लगा है। हमेशा भरा रहने वाला नंदी हॉल शुक्रवार को सुबह के समय खाली था। हालांकि गणेश और कार्तिकेय मंडपम से श्रद्धालुओं के दर्शन निर्बाध जारी थे।
भस्मार्ती दर्शन में होता था खेल
दर्शन कांड को अंजाम देने वाले शीघ्र दर्शन, देहरी दर्शन, नंदी हॉल दर्शन के नाम पर तो रुपया वसूलते ही थे लेकिन इनकी कमाई का बड़ा जरिया भस्मार्ती पास थे। देश के 12 ज्योर्तिलिंगों मे से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में ही भस्मार्ती होती है और इसका फायदा यह रैकेट उठाता था।
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति भस्मार्ती के लिए रोजाना 1800 अनुमति जारी करती है। इसमें से 500 का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होता है। 100 लोगों को ऑफलाइन प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए रोजाना शाम को पास जारी किए जाते हैं। पंडे-पुजारियों को 300 और राजनेताओं को 400 पास जारी किए जाते हैं। शेष 500 अनुमति वीआईपी कोटे से दी जाती है और खेल इसी में होता है।
इधर शुक्रवार को मंदिर की प्रोटोकॉल व्यवस्था में भारी कमी देखी गई। सुबह 6 से 9 बजे तक केवल 7 लोगों ने प्रोटोकॉल लिया । इन प्रोटोकॉल पर 30 लोगों ने ही दर्शन किए । यह प्रोटोकॉल जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, बैंक नोट प्रेस और विधायक डॉ. चिंतामण मालवीय की तरफ से लिए गए थे। कम प्रोटोकॉल होने से नंदीगृह सूना रहा और आम श्रद्धालुओं को दर्शन आसानी से हुए।
कैसे होता है खेल
दरअसल 500 अनुमतियां प्रोटोकॉल के तहत जारी की जाती है। लेकिन रोजाना कभी भी इतनी संख्या में वास्तविक तौर पर प्रोटोकॉल अनुमति नहीं मांगी जाती। औसतन विभागों और राजनीतिज्ञों द्वारा 200 लोगों के लिए ही प्रोटोकॉल मांगा जाता है। खेल शेष 300 अनुमतियों को लेकर होता है। सूत्रों के मुताबिक सत्कार अधिकारी के पास यह अनुमति देने के अधिकार होते हैं और इसी में गड़बड़ी की जाती है।
यह पास सत्कार अधिकारी के माध्यम से बड़ी होटलोंं के कस्टमर को दिए जाते हैं। इसमें जिला प्रोटोकॉल कार्यालय के कर्मचारियों की भी भूमिका रहती हैं। इनको भी जांच के दायरे में रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक होटल ऑनर कस्टमर को रूम के साथ भस्मार्ती पास का पैकेज देते हैं। चूंकि अन्य शहरों से आए भक्तों में भस्मार्ती का क्रेज रहता है, ऐसे में वह मुंहमांगी कीमत अदा करने को तैयार रहते हैं। इनमें से अधिकतर भक्त इंदौर रोड की होटलों में रुकते हैं। रुपए लेकर इन्हें हाथोंहाथ अनुमति मुहैया करा दी जाती है।










