मंत्रों की ध्वनि के बीच भगवान कोटेश्वर महादेव को लगी हल्दी

श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्र उत्सव की शुरुआत, ११ ब्राह्मणों ने किया रूद्रपाठ, उत्सव का उल्लास छाया

एकमात्र ज्योतिर्लिंग जहां शिव नवरात्र के रूप में मनाया जाता है महाशिवरात्रि पर्व
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को शिव नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हुई। सुबह 8 बजे मंत्रोच्चार के बीच शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन कर हल्दी अर्पित की। करीब एक घंटे के विशेष पूजन के बाद सुबह 9.30 बजे गर्भगृह में बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक-पूजन एवं 11 ब्राह्मणों द्वारा रूद्रपाठ किया गया। पूजन का यह क्रम दोपहर 1 बजे तक चला, तत्पश्चात भोग आरती हुई। दोपहर ३ बजे संध्या पूजन होगा, फिर बाबा महाकाल का चंदन शृंगार किया जाएगा। यह क्रम 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व तक चलेगा। उत्सव के हर दिन बाबा अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देंगे।
दरअसल, 12 ज्योतिर्लिंगों में से श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग ही एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां शिव नवरात्र के रूप में महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। हालांकि, इस बार तिथि में वृद्धि होने के कारण शिव नवरात्रि १० दिनों की रहेगी लेकिन उत्सव ११ दिनों तक चलेगा। शिव नवरात्र में अभिषेक-पूजन के विशेष अनुक्रम के कारण भोग आरती एवं संध्या पूजन का समय बदल गया। अभी तक सुबह १० बजे भोग आरती एवं शाम ५ बजे संध्या पूजन होता था लेकिन अब पूरे शिव नवरात्र के दौरान दोपहर १ बजे भोग आरती एवं दोपहर ३ बजे संध्या पूजन होगा।
दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ी
श्री महाकाल महालोक बनने के बाद से दर्शनार्थियों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। पर्व एवं त्यौहार के दौरान यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। सोमवार को शिव नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही दर्शनार्थियों की संख्या भी बढ़ गई। इसके चलते गणेश और कार्तिकेय मंडपम् श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। भगवान महाकाल के दर्शन कर भक्त भी भावविभोर हो गए। पूरे समय हॉल में जय महाकाल और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
मां हरसिद्धि को भी लगी हल्दी
इधर, शिव-शक्ति विवाह उत्सव के तहत ५२ शक्तिपीठों में से एक श्री हरसिद्धि मंदिर में सुबह मंगला आरती के दौरान मां को हल्दी लगाई गई। मंदिर के पुजारी महंत रामचंद्र गिरी ने बताया कि आज शाम ६.३० बजे आरती के बाद महिलाएं मंगल गीत गाएंगी। इसके बाद एक-दूसरे को हल्दी लगाई जाएगी, पताशे बांटे जाएंगे। सुहागिन महिलाएं अपने साथ हल्दी लेकर भी जाती हैं।
27 को दोपहर में भस्मार्ती
महाशिवरात्रि पर्व पर 26 फरवरी को दिनभर जलधारा से भगवान महाकाल का अभिषेक होगा एवं रातभर विशेष पूजन किया जाएगा। २७ फरवरी को सुबह भगवान के सप्तधान्य शृंगार एवं सेहरे के दर्शन होंगे। इसके बाद दोपहर १२ बजे भस्मार्ती होगी। साल में यह एकमात्र मौका होता है जब दोपहर में भस्मार्ती होती है। इस दिन ३ क्विंटल फूलों से बना बाबा महाकाल का सेहरा भक्तों के बीच लुटाया जाता है। मान्यता है बाबा के सेहरे के धान, फूल आदि रखने से घर हमेशा धन-धान्य से भरा रहता है। इस दौरान मंदिर के पट करीब ४४ घंटे खुले रहेंगे।








