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सिंहस्थ में स्थायी नगरी की योजना तैयार अब यूडीए बोर्ड से हरी झंडी का इंतजार

यूडीए बोर्ड में मास्टरप्लान पेश करने की तैयारी, 1800 सर्वे नंबरों की आपत्तियों का किया निराकरण

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जीआईएस मैप पर एक क्लिक से जमीन की दिखाई देती है कुंडली

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ में स्थायी कुंभ नगरी बसाने की योजना ने आकार ले लिया है। 1800 सर्वे नंबरों की आपत्तियों का निराकरण कर योजना को यूडीए बोर्ड के समक्ष पेश करने की तैयारी हो गई है। बोर्ड की हरी झंडी मिलने के बाद ले आउट तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। यूडीए ने इसके लिए खास जीआईएस मैप तैयार किया है, जिससे एक क्लिक पर कंप्यूटर स्क्रीन पर जमीन की पूरी कुंडली देखी जा सकती है।

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सिंहस्थ 2028 के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के अनुसार हरिद्वार की तर्ज पर स्थायी कुंभ नगरी विकसित करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इसके लिए जुलाई की डेडलाइन तय की गई है। सूत्रों के अनुसार एक दो दिन में यूडीए की बोर्ड बैठक में योजना पेश करने की तैयारी चल रही है। संभागायुक्त संजय गुप्ता की अध्यक्षता में यह बैठक कभी भी हो सकती है। इसमें योजना का पूरा खाका पेश किया जाएगा। योजना को लेकर आई अधिकतर आपत्तियों का निराकरण किया जा चुका है। सूत्रों के अनुसार टीडीएस 8, 9, 10 और 11 के नाम से प्राधिकरण ने यह योजना तैयार की है। इसके लिए 2300 हेक्टेयर से अधिक जमीन के डाटा जुटाए गए हैं। इसके आधार पर जीआईएस मैप तैयार किया गया है, जिससे सभी सर्वे नंबर और योजना की पूरी स्थिति एक क्लिक में देखी जा सकती है। यूडीए सीईओ संदीप कुमार सोनी ने इसके लिए खासतौर से सॉफ्टवेयर तैयार कराया।

प्रदेश के किसी प्राधिकरण की पहली बड़ी योजना
स्थायी कुंभ नगरी विकसित करने की यह योजना मध्यप्रदेश के किसी प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई यह पहली बड़ी योजना है। 2376 हेक्टेयर जमीन की यह योजना प्राधिकरण ने युद्धस्तर पर कम समय में तैयार की है। इसके लिए कार्यपालन यंत्री केसी पाटीदार सहित इंजीनियरों की टीम ने 1800 से अधिक सर्वे नंबरों का डाटा तैयार किया है।

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योजना एक नजऱ में

2376 हेक्टेयर जमीन पर विकसित होगी स्थायी कुंभ नगरी।

1800 से अधिक सर्वे नंबर की जमीन इसमें शामिल।

3000 से अधिक पन्नों का बना आपत्ति निराकरण का दस्तावेज।

हेक्टेयर जमीन पर हो गए निर्माण
सिंहस्थ के लिए 3061 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई थी, लेकिन स्थायी कुंभ नगरी के लिए 2376 हेक्टेयर जमीन को ही शामिल किया जा सका क्योंकि 600 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर पक्के निर्माण और कॉलोनियां कट चुकी हैं। 2028 के सिंहस्थ के लिए अभी जमीन अधिसूचित करना शेष है।

जमीन बेच दी, बटांकन नहीं करवाए
योजना तैयार करने में सबसे ज्यादा दिक्कत जमीन के सर्वे नंबरों को लेकर आई। किसी ने जमीन बेच दी लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई और कई लोगों ने बटांकन ही नहीं कराए। कुछ जमीनों के सर्वे नंबर ही जीरो दर्ज थे। इनके पुराने रिकॉर्ड खंगालकर दुरुस्त करवाए।

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