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प्रपंच छोडक़र प्रकृति को अपनाना होगा तभी हम सही अर्थ में यूनिक बन पाएंगे

कामाख्या की महिला कापालिक भुवनेश्वरी सरस्वतीजी से अक्षरविश्व की विशेष चर्चा…

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बेहतरीन बनने के लिए अनुभव जरूरी है हम प्राकृतिक हैं प्रपंची नहीं

उज्जैन। इंसान प्राकृतिक यूनिट है और उसे प्रपंच छोडक़र प्रकृति का आनंद लेना चाहिए, लेकिन मौजूदा दौर में आदमी दिमाग लगाता है और टेक्नोलॉजी के जरिए प्रपंच क्रिएट करता है। इस तरह वह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहा है। यह बात कामाख्या की महिला कापालिक भुवनेश्वरी सरस्वतीजी ने कहीं। वह गुरु पूर्णिमा उत्सव में शामिल होने के लिए आई थीं।

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अक्षरविश्व से उन्होंने नेचर, मेंटल और स्पिरिचुअल सहित कई मुद्दों पर बेबाक बात की। सरस्वती ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य परेशान इस बात को लेकर है कि वह शॉर्ट टाइम में जल्दी प्रोडेक्टिव बनने की कोशिश कर रहा है। होना जबकि यह चाहिए कि वह डीप में जाए। जब आप डीप में जाएंगे जो तर्जुबा होगा और डिलेवरी बेहतरीन होगी, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। पहले के दौर में डॉक्टर मरीज के हाव-भाव से ही मर्ज (बीमारी) पकड़ लेते थे। अब वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर पा रहे है, क्योंकि उनका अनुभव गहरा नहीं है।

संयुक्त परिवार बहुत सिखाता है
पहले संयुक्त परिवार होते थे, जब बच्चा बहुत कुछ सिखता था। पिता गलती करने पर बच्चों को डांटते थे तो मां समझाती थी। नाना-नानी और दादा-दादी अलग तरह की सीख देते थे। इस तरह एक ही जगह बच्चा कई तरह का सबक हासिल कर लेता था, अब ऐसा नहीं है। हम बच्चों को छोटेपन से ही अलग बेडरूम दे रहे हैं। आज बच्चों में अकेलापन है। बच्चों को जब तक अकेला नहीं छोडऩा चाहिए, जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती। अगर वह खाली रहेंगे तो ज्यादा सोचेंगे। अधूरा एनालिसिस करेंगे और इस तरह कभी बेहतरीन तर्जुबा हासिल नहीं कर पाएंगे। सोच, समझ और सुलझ तो बच्चे को परिवार से ही मिलती है।

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तीन तरह का बैलेंस जरूरी
हम प्राकृतिक हैं तो हमारे भीतर तीन तरह का बैलेंस जरूरी है। पहला फिजिकल (स्वस्थ रहना), दूसरा मेंटल (तनावरहित जीवन) और तीसरा स्पिरिचुअल (अध्यात्मिक)। अगर ये नहीं हैं तो हम कुछ नहीं है। कहने को हम एलीट (संभ्रांत) हो जाएंगे, लेकिन वक्त बिताकर मर जाएंगे। आज 21 साल की उम्र में युवा जॉब कर रहे हैं। पैसा कमा रहे हैं। इससे लाइफ तो मिल जाएगी, लेकिन सोच, समझ, सुलझ नहीं मिलेगी। वह प्राकृतिक नहीं हो पाएंगे।

गहरी नींद आवश्यक
प्राकृतिक होने की निशानी यह है कि आप गहरी नींद के आदी हो। यह नींद ऐसी होनी चाहिए कि जिसमें सपने भी नहीं आए, तभी आप सुबह बेहतर महसूस कर सकेंगे। योगा के बारे में उन्होंने कहा कि योगा का मतलब ही तालमेल है। वह मेंटल, फिजिकल और स्पिरिचुअल हेल्थ बनाता है, क्योंकि बीइंग नैचुरल, हमें सहज रहना होगा। हम जैसे भी हैं यूनिक हंै, क्योंकि हमें ईश्वर ने यूनिक फीचर देकर भेजा है। बस हमें इसे और चमकाने की जरूरत है। गुरु अंदर है। आत्मा अंदर है। भीतर की यात्रा करो। यही तो जीवन है।

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