आखिर डीपीसी को मिल गई कुर्सी

कोर्ट के ऑर्डर पर प्रशासन के निर्देश पर त्रिपाठी ने किया ज्वाइन

रोटी मेकर मशीन और हॉस्टल के 1600 गद्दे खरीदी का मामला उभरा
उज्जैन। शिक्षा विभाग में डीपीसी (जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान) अशोक त्रिपाठी को ट्रांसफर के बाद भी वापस अपनी कुर्सी मिल गई है। जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह से हरी झंडी मिलने के बाद उन्होंने दो दिन पहले ज्वाइन कर लिया है, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हॉस्टल के लिए रोटी मेकर मशीन 1600 गद्दे खरीदी का मामला उभर आया है।
राज्य शासन ने कुछ समय पहले डीपीसी त्रिपाठी का ट्रांसफर गृहनगर के पास छतरपुर में कर दिया था। इसके लिए उन्होंने स्वयं आवेदन भी किया था लेकिन ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और स्टे ले लिया। इसके आधार पर उन्होंने स्वयं ही ज्वाइन भी कर नोटशीट प्रशासन के पास भेजी थी। फाइल जिला पंचायत सीईओ के माध्यम से कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के पास पहुंची। त्रिपाठी ने तीन दिन पहले डीपीसी पद पर ज्वाइन कर लिया।
शिवपुरी में बीआरसी से मारपीट का मामला भी चर्चा में: शिवपुरी में डीपीसी के रूप में जब त्रिपाठी 2023 में पदस्थ थे, तब उनका विवाद बीआरसी बालकृष्ण ओझा के बीच विवाद हो गया था। खबरों के अनुसार दोनों के बीच बात इतनी बड़ी कि दफ्तर में ही मारपीट और टेबल कुर्सी तक फेंकी गई थी। मामला शिवपुरी के कोतवाली पुलिस थाने भी पहुंचा था, जहां ओझा ने त्रिपाठी पर किसी बात के लिए दबाव बनाने का आरोप भी मीडिया के सामने लगाया था। वीडियो और शिवपुरी विवाद की खबरें अब जिला प्रशासन के अधिकारियों के पास भी पहुंची हैं, जिससे मामला सुर्खियों में है। त्रिपाठी ने भी ओझा के विरुद्ध शिवपुरी के पुलिस थाने में आवेदन दिया था।
इसलिए चर्चा में कुर्सी का किस्सा
सरकारी पदों पर ट्रांसफर सामान्य बात है लेकिन डीपीसी का मामला इसलिए विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि त्रिपाठी ने पहले ट्रांसफर का आवेदन किया और ट्रांसफर के बाद कोर्ट से स्टे ले लिया। विभाग में ऊपर से नीचे तक यह पूछा जा रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा। चर्चा विद्यार्थियों के हॉस्टल के लिए रोटी मेकर मशीनें और 1600 गद्दे खरीदी की भी है। इनके भुगतान भी अभी बाकी हैं।









