गंभीर की फिक्र दूर करेगा 1200 करोड़ का इंटेकवेल

नर्मदा का पानी सीधे गंभीर डेम तक पहुंचाने की योजना का चल रहा काम

अभी काम पूरा होने में दो माह का और इंतजार
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले गंभीर डेम का कंठ इस बार सूखने आ गया है, लेकिन 1200 करोड़ के प्रोजेक्ट के माध्यम से नर्मदा का पानी सीधे डेम के पास बन रहे इंटेकवेल तक पहुंचाया जा सकेगा। नया इंटेकवेल बनने में अभी दो माह का समय लग सकता है, लेकिन जल निगम इसे जल्दी बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। लाइन जोडऩे के लिए बडऩगर रोड रेलवे क्रॉसिंग पर काम करने के लिए शटडाउन लिया गया है।
गंभीर डेम में इस बार अब तक पानी नहीं आ सका है। इस कारण यह तेजी से सूख रहा है। जलसंकट दस्तक दे रहा है, लेकिन गंभीर डेम में नर्मदा का पानी लाने के लिए नया इंटेकवेल भी बनकर तैयार हो गया है। इसमें पंप और लाइन जोडऩे का काम शुरू कर दिया गया है। इसे बडऩगर रोड पर नर्मदा की लाइन से जोडऩे की तैयारी भी शुरू हो गई है। इसके लिए मुरलीपुरा (मुल्लापुरा) में रेलवे क्रॉसिंग के पास लाइन जोडऩे के लिए मंगलवार, 22 जुलाई का शटडाउन लिया गया है।
नया इंटेकवेल जल निगम द्वारा बनाया जा रहा है। प्रभारी अधिकारी घनश्याम उपाध्याय ने बताया अभी इंटेकवेल पर प्लास्टर का काम बचा है। पंप लगाने और लाइन जोडऩे का काम शुरू कर दिया गया है। इंटकवेल 20 मीटर गहरा, 14 मीटर व्यास का बनाया गया है। पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन चिंतामन गणेश से गंभीर बांध तक बिछाई जाएगी। पाइप लाइन का टी-कनेक्शन 1,856 करोड़ रुपए की नर्मदा-शिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना अंतर्गत होगा।
योजना का उद्देश्य गांवों में घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। ये देश की ऐसी पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसमें नर्मदा का पानी दो जिलों के गांवों तक घरेलू उपयोग के लिए पहुंचेगा। विभिन्न गांवों में पाइप लाइन बिछाकर, टंकी बनाकर प्रत्येक व्यक्ति के घरों तक पानी पहुंचाया जाएगा। शेष गांवों में ग्रामीण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा पानी की टंकियों से नर्मदा जल पहुंचाया जाएगा।
216 एमसीएफटी पानी बचा डेम में सिर्फ, पिछले साल से आधा भी नहीं
इधर, तेजी से सूख रहा गंभीर का कंठ…
उज्जैन। सावन माह शुरू होने के बाद भी गंभीर डेम में इस बार पानी बढ़ नहीं सका है। पिछले साल की तुलना में 219 एमसीएफटी पानी कम है। डेम में अब सिर्फ 216 एमसीएफटी पानी ही बचा है, जबकि रोज 5 एमसीएफटी पानी कम हो रहा। इससे पेयजल की चिंता बढ़ रही है। आज सोमवार सुबह की स्थिति में डेम में 216.272 एमसीएफटी ही बचा है। इसमें भी 100 एमसीएफटी पानी डेड स्टोरेज के रूप में रहता है। डेड स्टोरेज का पानी पीने के लिए उपयोग में नहीं लिया जाता है। जलसंकट की स्थिति में चैनल कटिंग द्वारा डेम का पानी फिल्टर कर उपयोग में लिया जाता है। इसलिए जलसंकट की यह स्थिति आसमान से होने वाली बारिश से ही दूर होने की उम्मीद है। डेम में इस बार पिछले साल की तुलना में 219 एमसीएफटी पानी कम है। गंभीर डेम प्रभारी दिलीप नौधाने के अनुसार नर्मदा के पानी से पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।









