हाईटेक रेलवे स्टेशन-माहौल असुरक्षित

एडवांस क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरों के बीच मासूमों को छोड़कर जा रहे लोग, जीआरपी अब भी खाली हाथ

उज्जैन। आए दिन दावा किया जाता है कि उज्जैन रेलवे स्टेशन को सुरक्षित बना दिया गया है। यहां हाईटेक सीसीटीवी लगा दिए गए हैं, लेकिन बच्चे छोड़कर जा रहे लोगों को जीआरपी लंबे समय बाद भी नहीं पकड़ पा रही है। अभी यह हालत है तो सिंहस्थ के भीड़भरे माहौल में इंतजाम कैसे होंगे। पिछले एक माह में ऐसी दो घटनाएं हुई हैं जिनमें लोग छोटे बच्चों को स्टेशन पर छोड़कर चले गए हैं। पहली घटना 29 जुलाई की है जिसमें एक महिला अपनी एक महीने की मासूम बच्ची को स्टेशन पर एक यात्री को यह कहकर सौंप देती है कि वो शौचालय होकर आती है। लंबे समय तक महिला के नहीं लौटने पर बच्चे को जीआरपी के हवाले कर दिया गया था।
दूसरी घटना बुधवार 3 सितंबर की है। दोपहर 12 बजे के लगभग प्लेटफार्म नंबर-1 पर 3 साल और 6 माह की दो बेटियों को अज्ञात लोग छोड़कर चले जाते हैं। 3 साल की बच्ची 6 माह की बहन को गोद में लेकर घूमते हुए यात्रियों की नजर में आती है और फिर जीआरपी को सौंप दिया जाता है।
दोनों मामलों में सीसीटीवी मिले, लेकिन आरोपी नहीं
इन दोनों ही घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज जीआरपी को मिल चुके हैं। पहले मामले में बच्चे को सौंपने के बाद महिला तेजी से स्टेशन के बाहर जाती नजर आती है। दूसरे मामले में प्लेफॉर्म नंबर २ व तीन के बीच दोनों मासूम इंदौर पैसेंजर ट्रेन से उतरते दिखती है लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी बच्चा छोड़कर जाने वाले को जीआरपी ढूंढ नहीं सकी है। तीनों बच्चे मातृछाया के संरक्षण में सौंप दिए गए हैं। इन मामलों को लेकर जीआरपी के विशेष प्रयास कहीं नहीं नजर नहीं आते, हालांकि, हर बार सिर्फ एक ही जवाब मिलता है कि जांच जारी है।









