रफ्तार के सुनहरे पंखों पर सवार उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन

सिक्सलेन इंदौर के अरबिंदो मेडिकल कॉलेज से उज्जैन के हरिफाटक ओवरब्रिज तक बनेगा
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सिंहस्थ 2028 से पहले बनने वाले उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन निर्माण का काम तेज रफ्तार से चल रहा है। जिस स्पीड से वर्तमान में काम किया जा रहा है उसे देखकर कहा जा सकता है कि यह तय समय पर पूरा होगा और इसके बनने से भारी ट्रैफिक से राहत मिलेगी।
विशाल जूनवाल उज्जैन। उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन का भूमिपूजन 19 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। इस फोरलेन को सिक्सलेन में तेजी से बदला जा रहा है। 1692 करोड़ रुपए की लागत वाले सिक्सलेन का निर्माण महाकाल हाईवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कर रही है। फोरलेन में 8.5-8.5 मीटर की दो-दो नई लेन बन रही है। इससे सड़क 12.5-12.5 मीटर चौड़ी होकर 25 मीटर की हो जाएगी। 46.475 किमी का सिक्सलेन इंदौर के अरबिंदो मेडिकल कॉलेज से उज्जैन के हरिफाटक ओवरब्रिज तक बनेगा। पूरे मार्ग को टुकड़ों-टुकड़ों में बांटकर काम तेजी से किया जा रहा है। सिंहस्थ 2028के पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा।
- लागत 1692 करोड़ रुपए
- लंबाई 46.475 किमी
- चौड़ाई 25 मीटर
- फ्लाय-ओवर 03
- अंडरपास 06
- भूमिपूजन- 19 सितंबर 24
सिक्सलेन में यह खास
आधुनिक मार्वल- दो ऐतिहासिक शहर इंदौर-उज्जैन को जोडऩे वाला 46 किमी का विस्तार।
सुगम यात्रा- निर्बाध यात्रा के लिए 6 लेन, 3 फ्लाईओवर और 6 अंडरपास।
विरासत और भक्ति- आर्थिक राजधानी इंदौर और आध्यात्मिक सिटी उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा।
आर्थिक बढ़ावा- व्यापार, पर्यटन और तीर्थयात्रा की सुविधा प्रदान करेगा जिससे क्षेत्रीय विकास होगा।
सुरक्षा और आराम- सुरक्षित और अधिक आनंददायक सफर के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा।
लक्ष्य जो साकार हो रहा- उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन जो आने वाले समय में परिवहन में बदलाव लाएगा और दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक बंधन को और मजबूत करेगा।
25000 वाहनों की आवाजाही अभी हर दिन
सिक्सलेन को अगले 25 सालों की जरूरत को देखते हुए बनाया जा रहा है। फिलहाल इंदौर-उज्जैन फोरलेन पर रोज २5 हजार से ज्यादा वाहनों का लोड है। एक अनुमान के मुताबिक सिंहस्थ 2028 के दौरानट्रैफिक लोड हर दिन करीब 60 हजार वाहनों का होगा। हालांकि, इसके बनने के बाद इंदौर रूट से उज्जैन आने वालों का सफर और आसान हो जाएगा।









