स्मार्ट सिग्नल के सामने ‘स्मार्ट’ बन रहे लोग बेखौफ तोड़ रहे नियम

अक्षरविश्व लाइव : चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक नियमों का रियलिटी चैक

उज्जैन। उज्जैन की सडक़ों पर ट्रैफिक नियम अब मजाक बन चुके हैं। रोज दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी, ओवरलोडिंग और रांग साइड से वाहन चलाने जैसे दृश्य अब आम हो चले हैं। दिनभर में कई बार सडक़ पर यातायात के नियम-कायदे दम तोड़ते नजर आते हैं। इसका सबूत चौराहों से टै्रफिक पुलिस की गैरमौजूदगी और लापरवाही है।
इसी की असलियत जानने के लिए अक्षरविश्व टीम ने शहर के चार प्रमुख चौराहों का शनिवार दोपहर रियलिटी चैक किया। जहां न केवल वाहन चालक खुलेआम ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते नजर आए बल्कि चौराहों पर पुलिस भी कहीं नजर नहीं आई। शहर के ४ बड़े चौराहों पर बिना हेलमेट लगाए वाहन चालक रेड लाइट से गुजरते रहे।
तीन बत्ती चौराहा : समय- दोपहर 1:45 बजे

यहां ट्रैफिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन होता रहा। बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के गुजरते रहे। इतना ही कई वाहन चालक ने रेड सिग्नल की भी अनदेखी की। यह सब होता रहा लेकिन इसे रोकने के लिए एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। इस दौरान कई वाहन जाम जैसी स्थिति भी बनी।
चामुंडा माता चौराहा : समय- दोपहर 2:29 बजे

शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक, जहां से दिनभर हजारों वाहन निकलते हैं। यहां भी किसी पुलिसकर्मी की ड्यूटी नहीं थी। ऐसे में वाहन चालक अपनी मर्जी से सिग्नल तोडक़र फर्राटे भरते रहे। किसी ने हेलमेट नहीं पहना था तो कोई बेखौफ एक बाइक पर तीन सवारियों को लेकर जा रहा था।
कोयला फाटक चौराहा : समय- दोपहर 2:35 बजे

इस चौराहे पर भी ट्रैफिक नियमों की खुली अनदेखी देखने को मिली। यहां रियलिटी चैक के दौरान न तो कोई ट्रैफिक जवान तैनात दिखाई दिया और न ही नियमों के पालन को लेकर कोई निगरानी व्यवस्था नजर आई। इस दौरान कई दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के गुजरते रहे, जबकि कुछ सिग्नल की भी अनदेखी करते नजर आए।
नानाखेड़ा चौराहा : समय- शाम 6:15 बजे

इंदौर की ओर से शहर में आने का यह प्रमुख चौराहा है लेकिन अन्य चौराहों की तरह ही यहां भी कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। कभी सिग्नल चल रहा था तो कभी बंद हो रहा था। इस दौरान कुछ लोग रेड सिग्नल पर रुके तो कुछ बिना रुके ही निकल गए। ऐसे में चारों ओर से वाहन गुत्थगुत्था भी होते रहे।
कभी-कभार होती है चैकिंग
देश में होने वाली किसी बड़ी घटना या कभी-कभार रूटिन के नाम पर हेलमेट ना पहनने वालों और ट्रैफिक रूल तोडऩे वाले वाहनों की चैकिंग की जाती है। यह ऊपर से मिले आदेश पर होता है। इसके लिए पुलिस एक खास चौराहे को चुनती है और वहां खड़े होकर समझाइश देकर रूल तोडऩे वालों को या तो गुलाब दे देती है, या फिर चालान काट देती है। इसके बाद फोटो खींचने के साथ ही अभियान खत्म हो जाता है।
इसलिए टू-व्हीलर चलाते समय हेलमेट जरूरी
बिना हेलमेट टू-व्हीलर चलाते समय होने वाले एक्सीडेंट में ज्यादातर मौतें हेड इंजरी की वजह से होती हैं।
हेलमेट एक्सीडेंट होने की स्थिति में सिर की रक्षा करता है।
हेलमेट पहनने से सर्वाइकल स्पाइन इंजरी होने का खतरा कम जो जाता है।
हेलमेट आंखों को तेज हवा, धूल, मिट्टी, कीटाणु और इंफेक्शन से भी बचाता है।
बाहरी शोर धीमा हो जाता है जिससे कानों को सुकून मिलता है।
हेलमेट से सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी आती है।
ठप पड़ा अभियान
पिछले दिनों उज्जैन पुलिस ने हेलमेट अभियान की शुरुआत की थी। कुछ दिन हेलमेट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों को समझाइश दी गई, उसके बाद चालान बनाए गए। मौके पर कम कीमत में वाहन चालकों को हेलमेट भी दिलवाए गए लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान ठप हो गया और अब स्थिति पहले की तरह हो गई है।
पहले तैनात रहते ट्रैफिक पुलिसकर्मी
कुछ साल पहले तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी प्रमुख चौराहों पर तैनात होते थे। यदि कभी सिग्नल बंद हो जाए या तकनीकी खामी आ जाए तो जवान फौरन अपनी जगह संभाल लेते थे और ट्रैफिक व्यवस्था को बिगडऩे नहीं देते थे लेकिन काफी समय से अब चौराहों पर इनकी तैनाती नहीं जिससे हर रोज सडक़ों पर नियम दम तोडऩे नजर आते हैं।
अभी बल की कमी है- ट्रैफिक में बल की कमी है। इंदौर रोड पर सिक्सलेन का काम चल रहा है, वहां पर चार से पांच पॉइंट लगाने पड़ते हैं इसलिए यातायात पुलिसकर्मी तैनात नहीं किए जा रहे। 212 पद स्वीकृत हैं लेकिन 100 के अंदर ही पुलिसकर्मी हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस संबंध में कई बार बता चुके हैं। जब भी बल मिलेगा तब उन्हें प्रमुख चौराहों पर लगाकर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। – दिलीप सिंह परिहार डीएसपी, ट्रैफिक









