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गैर जिम्मेदारी : लोकल एनेस्थिीसिया से गिरी पल्स, बच्ची की मौत, हंगामा

अस्पताल की बजाय क्लीनिक में हेल्थ विभाग के सहायक संयुक्त संचालक ने कर दिया ऑपरेशन

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सात डॉक्टरों की पैनल ने किया पीएम, क्लीनिक सील, संचालक हिरासत में, ऑपरेशन करने वाला फरार

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। मंछामन कॉलोनी स्थित एक निजी क्लीनिक में 11 वर्षीय बालिका की मौत ने जिले में चल रहे हेल्थ सिस्टम की पोल खोल दी है। क्लीनिक में सिर्फ ओपीडी सेवा संचालित हो सकती थी लेकिन हेल्थ विभाग के सहायक संयुक्त संचालक डॉ. डीके तिवारी ने बालिका का ऑपरेशन कर डाला।

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ऑपरेशन में सावधानी नहीं बरती गई, रजिस्टर्ड एनेस्थिेटिस्ट नहीं मिलने पर लोकल एनेस्थिीसिया दे दे दिया। नतीजा बालिका की पहले ऑक्सीजन कम हुई और फिर पल्स गिरती चली गई। ताबड़तोड़ उसे एक अन्य निजी अस्पताल रैफर किया गया लेकिन बालिका की जान चली गई। जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक के पास न तो ऑपरेशन की अनुमति थी और न ही अस्पताल का वैध पंजीयन।

क्लीनिक केवल परामर्श (ओपीडी) के लिए था, जो कि डॉ. राजेश चौहान के नाम से रजिस्टर्ड है। हादसे के बाद प्रशासन ने क्लीनिक सील कर दिया है और डॉक्टर राजेश चौहान को हिरासत में ले लिया है। रविवार सुबह ७ डॉक्टरों की पैनल की मौजूदगी में बच्ची के शव का पीएम कर परिजनों को सौंप दिया गया।

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दरअसल राघवी तहसील के ग्राम टिल्याखेड़ी) निवासी मेहरबान सिंह डाबी की पुत्री दीपिका (11) को एक महीने से पेट दर्द की शिकायत थी। उसे मंछामन कॉलोनी स्थित जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक के डॉ. राजेश चौहान को दिखाया गया था। डॉक्टर ने अपेंडिक्स बताया था और शनिवार को क्लीनिक में ही हेल्थ विभाग के सहायक संयुक्त संचालक डॉ. डीके तिवारी ने ऑपरेशन किया था। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान बालिका की स्थिति बिगड़ी तो डॉक्टर ने परिजनों को बगैर बताए फ्रीगंज स्थित अपना अस्पताल भेज दिया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन वापस क्लीनिक पहुंचे, तो वहां ताला था और स्टाफ भाग चुका था।

सहायक संयुक्त संचालक डॉ. डीके तिवारी से सीधी बात

बच्ची का ऑपरेशन करने वाले डॉ. डीके तिवारी स्वास्थ्य विभाग में सहायक संयुक्त संचालक है। अक्षर विश्व ने उनसे पूरे घटनाक्रम पर सीधी बात की।

बच्ची की मौत कैसे हुई?

उत्तर : यह पीएम और विसरा रिपोर्ट के बाद पता चलेगा।

बच्ची के ऑपरेशन की जरूरत क्यों पड़ी?

उत्तर : बच्ची को अपेंडिक्स था। उसे दर्द हो रहा था। यह रूटीन नहीं इमरजेंसी ऑपरेशन था।

इमरजेंसी ऑपरेशन था तो सावधानी क्यों नहीं रखी?

उत्तर : शनिवार होने से एनेस्थिेटिस्ट नहीं मिल रहे थे। ऐसे में लोकल एनेस्थिीसिया देने का फैसला किया। इससे हालत बिगड़ गई। ऑक्सीजन और पल्स गिरी तो बच्ची को तत्काल रैफर कर दिया था।

क्या आपको मालूम था कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं था?

उत्तर : इसकी जानकारी नहीं थी।

आप तो स्वास्थ्य विभाग के सहायक संयुक्त संचालक है फिर भी जानकारी नहीं थी?

उत्तर : नहीं थी। यह जानकारी सीएमएचओ के पास रहती है।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पीएम
रविवार सुबह भारी पुलिसबल की मौजूदगी में शव का पीएम किया गया। सात डॉक्टर्स की टीम ने यह किया। टीम में डॉ. शिव मेनिया, डॉ शीतल गुप्ता, डॉ. एके सिंह, डॉ. विक्रम रघुवंशी, डॉ. दिलीप वास्के, डॉ. अभिषेक जाटव और सीएमएचओ डॉ. अशोक पटेल शामिल थे। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

मुकदमा दर्ज, डॉक्टर हिरासत में, प्रबंधक फरार
नीलगंगा पुलिस ने शनिवार रात १२.४० बजे बालिका की मां मंजू पति मेहरबान डाबी (४०) की शिकायत पर प्रकरण दर्ज क्लीनिक संचालक डॉ. राजेश चौहान को हिरासत में ले लिया है। जबकि इलाज करने वाले डॉ. डीके तिवारी फरार है।

6 माह पहले शुरू किया था अस्पताल

जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक के पास न तो ऑपरेशन की अनुमति थी और न ही अस्पताल का वैध पंजीयन था। डॉ. राजेश चौहान ने करीब ६ महीने पहले क्लीनिक शुरू किया था। इसके पहले वो किसी और नाम से दूसरी जगह क्लीनिक चलाते थे। सूत्रों के मुताबिक डॉ. राजेश चौहान के नाम कोई भी वैध डॉक्टरी डिग्री नहीं है। उनका बेटा जरूर आयुर्वेद डॉक्टर (बीएएमएस) है।

इनका कहना

सात डॉक्टरों की पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया है। बिसरा जब्त कर फोरेंसिंक को सौंपा है। वहीं से मौत का असली कारण सामने आएगा। –डॉ. विक्रम रघुवंशी, अधीक्षक माधवनगर अस्पताल

 

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