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डीजल महंगा पड़ते ही 19 लाख ट्रकों के पहिए थमे! बढ़ सकता है खाने-पीने के सामान का दाम

डीजल की बढ़ती कीमतों ने देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि देशभर के करीब 95 लाख ट्रकों में से लगभग 19 लाख यानी 20 फीसदी ट्रक सड़कों से हट चुके हैं। ट्रांसपोर्टरों के लिए डीजल का बोझ उठाना मुश्किल होता जा रहा है और इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई तक पहुंचने वाला है।

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11 दिन में 4 बार बढ़े दाम, पंपों पर लंबी कतारें

पिछले 11 दिनों में सरकारी तेल कंपनियां चार बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा चुकी हैं और कुल बढ़त 7.5 से 8 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंची है। नेशनल हाईवे के पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कई जगह 6 से 8 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मालभाड़ा बढ़ा, महंगाई की तैयारी करें

ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने डीजल की ऊंची कीमतों का बोझ मालभाड़े पर डालना शुरू कर दिया है। पश्चिम से उत्तर भारत जैसे मुख्य रूटों पर भाड़ा 10 से 15 फीसदी तक बढ़ चुका है। 30 किलोमीटर तक की लोकल ढुलाई में तो और भी ज्यादा इजाफा हुआ है। इसका नतीजा यह होगा कि आने वाले दिनों में फल, सब्जी और राशन के दाम चढ़ सकते हैं।

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छोटे ट्रक ऑपरेटर सबसे ज्यादा मुश्किल में

भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा छोटे ऑपरेटर हैं। ट्रक चलाने के कुल खर्च में अकेले डीजल का हिस्सा 40 से 45 फीसदी होता है। किस्तों में हुई इस बढ़ोतरी का बोझ छोटे ऑपरेटर अब उठाने की स्थिति में नहीं हैं। कई पेट्रोल पंपों ने उधार पर तेल देना बंद कर दिया है जिससे वर्किंग कैपिटल का संकट और गहरा हो गया है।

थोक डीजल महंगा हुआ तो पंपों पर उमड़ पड़े बड़े संस्थान

बाजार में इस वक्त थोक और रिटेल डीजल के दामों में 40 से 42 रुपये प्रति लीटर का फर्क है। सरकार ने हाल ही में इंडस्ट्रियल डीजल के दाम 22 रुपये बढ़ाए थे। इसके बाद जो बड़े संस्थान पहले थोक में तेल खरीदते थे वे अब आम पेट्रोल पंपों पर आ गए हैं जिससे रिटेल पंपों पर सप्लाई कम पड़ रही है और आम लोगों को परेशानी हो रही है।

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तेल कंपनियों का दावा — किल्लत अस्थायी है

इंडियन ऑयल समेत सरकारी तेल कंपनियों ने देशव्यापी कमी से इनकार किया है। उनका कहना है कि पेट्रोल की बिक्री 14 फीसदी और डीजल की 18 फीसदी बढ़ी है। कंपनियों के मुताबिक किल्लत सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों में है और यह अस्थायी है। मानसून आते ही खेती और पर्यटन की मांग घटेगी जिससे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

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