बकरीद पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम से खुलेगा, एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

बकरीद पर गुरुवार 28 मई को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। हालांकि कमोडिटी मार्केट में दोपहर तक कामकाज नहीं हुआ और शाम 5 बजे से वहां ट्रेडिंग दोबारा शुरू हुई।
कल के बाजार में छाई रही मायूसी
बुधवार 27 मई को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का रुख रहा। सेंसेक्स 142 अंकों की कमजोरी के साथ 75,868 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 7 अंक टूटकर 23,907 पर आकर रुका। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।
एशियाई बाजारों में भी पसरी लाली
दुनिया के एशियाई बाजारों में गुरुवार को जबरदस्त गिरावट रही। साउथ कोरिया का कोस्पी 256 अंक यानी 3.08 प्रतिशत टूटकर 7,984 पर आ गया। जापान का निक्केई 683 अंक यानी 1.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 64,309 पर बंद हुआ। हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग में 588 अंकों यानी 2.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह 24,740 पर पहुंच गया।
अमेरिकी बाजारों ने दिखाई हल्की मजबूती
जहां एशिया में मायूसी थी वहीं अमेरिकी बाजार बुधवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोन्स 183 अंक चढ़कर 50,644 पर पहुंचा। नैस्डैक 19 अंक की मामूली तेजी के साथ 26,675 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 ने भी 1 अंक की बढ़त के साथ 7,520 का स्तर छुआ।
विदेशी निवेशकों ने एक महीने में 45 हजार करोड़ निकाले
भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़े पैमाने पर निकासी जारी है। बीते 30 दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 45,374 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। पिछले 7 दिनों में यह बिकवाली 7,069 करोड़ रुपये रही जबकि एक दिन में 1,043 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई।
दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को संभाले रखा। बीते 30 दिनों में उन्होंने 71,654 करोड़ रुपये की खरीदारी की। पिछले 7 दिनों में 15,043 करोड़ और एक दिन में 3,821 करोड़ रुपये की लिवाली दर्ज की गई।
कच्चे तेल ने लगाई आग, 4 फीसदी का उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखा। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 4 प्रतिशत महंगा होकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब जा पहुंचा। तेल की यह उछाल दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है क्योंकि महंगे ईंधन का असर महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर एक साथ पड़ता है।
महंगा तेल बाजार को क्यों गिराता है, समझें आसान भाषा में
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है तो देश से बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है जिससे रुपये की कीमत कमजोर पड़ने लगती है। इसके साथ ही कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है और उनका मुनाफा सिकुड़ने लगता है। जब मुनाफे पर खतरा मंडराता है तो निवेशक शेयर बेचने लगते हैं और बाजार में गिरावट आ जाती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की हर हलचल पर पूरे देश के निवेशकों की नजरें टिकी रहती हैं।









