उज्जैन आरटीओ की 192 बसों के रजिस्ट्रेशन निरस्त

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। प्रदेश के परिवहन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जिले की 192 बसों सहित प्रदेशभर की 2440 नई बसों के पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) निरस्त करने के आदेश जारी हैं। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने यह आदेश जारी किए हैं।
परिवहन आयुक्त कार्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि प्रदेश के कई क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से नई यात्री बसों का पंजीयन किया जा रहा है। नियमानुसार, 1 सितंबर 2025 से पहले बस चैसिस पर अलग से बनाई गई बॉडी के लिए बस बॉडी बिल्डर द्वारा फॉर्म 22बी जारी कर सेल्फ सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणीकरण) किए जाने का प्रावधान था। इसके बाद अप्रूवल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया था। वाहन पोर्टल के आंकड़ों की जांच में सामने आया कि नियमों को ताक पर रखकर प्रदेश में चैसिस पर अलग से बॉडी बनवाने वाली 1487 यात्री बसों सहित कुल 2440 नई बसों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया।
इन जिलों में हुआ सबसे बड़ा खेल: इस नियम विरुद्ध कार्रवाई में सबसे आगे इंदौर, नीमच, देवास, उज्जैन, आगर मालवा, भोपाल, झाबुआ और खरगोन के आरटीओ कार्यालय रहे हैं। परिवहन आयुक्त ने आदेश के साथ संबंधित बसों की सूची जिला परिवहन अधिकारियों को भेज दी है। उन्होंने सभी आरटीओ को निर्देशित किया है कि नियमों के उल्लंघन में पंजीकृत हुईं इन सभी बसों के पंजीयन 15 दिनों के भीतर निरस्त कर रिपोर्ट सौंपें।
परिवहन मंत्री को सौंपा पत्र
इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन मैदान में उतर आया है। एसोसिएशन के प्रदेश पदाधिकारी जय कुमार जैन और उज्जैन संभाग के प्रभारी शिव कुमार शर्मा ने परिवहन मंत्री और विभाग के आला अफसरों के सामने इस आदेश पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई है।
बस मालिकों के मुख्य तर्क
पदाधिकारियों का कहना है कि जब ये बसें शासन की गाइडलाइन और नियमों के तहत फिट नहीं बैठ रही थीं, तो आरटीओ कार्यालयों ने इनका पंजीयन क्यों किया? अधिकारियों को उसी वक्त इन्हें रोकना चाहिए था। बस मालिकों ने नियमानुसार पूरा सरकारी शुल्क जमा किया और वैध प्रक्रिया के तहत पंजीयन कराया। इसमें धोखाधड़ी या लापरवाही आरटीओ अफसरों या बस बॉडी बिल्डर की है। अचानक पंजीयन निरस्त होने से बस मालिकों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और यात्री परिवहन व्यवस्था भी ठप हो जाएगी। बस एसोसिएशन ने तथ्यों के साथ सरकार को पत्र सौंपकर मांग की है कि इस आदेश पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए।









