लखनऊ हादसे के बाद इंदौर में ‘ऑपरेशन कोचिंग’, कई संस्थानों पर कार्रवाई

त्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए हालिया हादसे से सबक लेते हुए इंदौर जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने शहर के कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों (कमर्शियल कॉम्प्लेक्स) की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था (फायर सेफ्टी) की सघन जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर के कई संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अचानक दबिश दी। इस औचक निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करते हुए गीता भवन स्थित प्रसिद्ध कैटालाइजर कोचिंग सेंटर (Catalyser Coaching Centre) सहित 10 प्रमुख संस्थानों व इमारतों को सील कर दिया गया।

कैटालाइजर कोचिंग में बंद मिला आपातकालीन रास्ता; टल सकता था बड़ा खतरा
जांच टीम जब गीता भवन क्षेत्र में स्थित कैटालाइजर कोचिंग सेंटर पहुंची, तो वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद डरावनी स्थिति सामने आई:
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अवरुद्ध आपातकालीन निकास: निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संस्थान का इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास द्वार) पूरी तरह बंद पड़ा था।
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छात्रों की जान से खिलवाड़: प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, किसी भी अनहोनी या आगजनी की स्थिति में बंद आपातकालीन रास्ता मासूम छात्रों की जान के लिए बेहद घातक साबित हो सकता था। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए टीम ने बिना कोई मोहलत दिए संस्थान को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया।
व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों का भी बुरा हाल
प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने सिर्फ कोचिंग ही नहीं, बल्कि शहर के कई बड़े कमर्शियल हब्स की भी सुध ली। जांच का दायरा भंवरकुआं क्षेत्र से लेकर एबी रोड तक फैला रहा:
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इन प्रमुख परिसरों की हुई जांच: टीम ने वेदा बिजनेस पार्क (Veda Business Park), अपोलो एवेन्यू, अपोलो आर्केड और भंवरकुआं के आसपास की बहुमंजिला इमारतों का बारीकी से मुआयना किया।
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खराब मिले उपकरण: कई इमारतों में आग बुझाने वाले सिलेंडर (अग्निशमन उपकरण) या तो पूरी तरह एक्सपायर/खराब हो चुके थे या फिर वे निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा कई बहुमंजिला इमारतों के कॉमन एरिया और रास्तों में सामान ठसा हुआ था, जिससे निकासी बाधित हो रही थी। इन सभी भवन संचालकों को कड़ी चेतावनी के साथ कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
‘ऑपरेशन कोचिंग’: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
भंवरकुआं और गीता भवन जैसे घनी आबादी वाले शैक्षणिक क्षेत्रों में इस विशेष अभियान का नेतृत्व खुद एसडीएम (SDM) घनश्याम धनगर कर रहे हैं।
एसडीएम घनश्याम धनगर का बयान: “विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘ऑपरेशन कोचिंग’ के तहत यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। जिन भी भवनों में कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ अन्य कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही हैं और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इसी कड़ी में कुछ रेस्टोरेंट, म्यूजियम और अन्य दफ्तरों पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई है।”
शपथपत्र और बिल दिखाने पर ही खुलेगी सील
प्रशासन ने साफ किया है कि इस सख्त कार्रवाई का उद्देश्य किसी का व्यवसाय बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें नियमों के दायरे में लाना है। सील की गई इमारतों को दोबारा खोलने के लिए संचालकों को निम्नलिखित प्रक्रिया से गुजरना होगा:
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लिखित आश्वासन: भवन संचालकों को प्रशासन के समक्ष एक कानूनी शपथपत्र (Affidavit) प्रस्तुत करना होगा, जिसमें 15 से 20 दिनों के भीतर सभी आवश्यक फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त करने का वादा करना होगा।
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दस्तावेजी प्रमाण: संचालकों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि नए सुरक्षा उपकरण खरीदने की रसीदें, कबाड़ हटाने के दस्तावेज और संबंधित वेंडर्स को दिए गए ऑर्डर्स की कॉपियां भी जमा करनी होंगी। इस कागजी और जमीनी वेरिफिकेशन के बाद ही सील खोलने की अनुमति दी जाएगी।









