Advertisement

हादसे में दिखी कौमी एकता… मलबे से जिंदगी बचाने मुस्लिमों के साथ दौड़ पड़े हिंदू और कानून के रखवाले

हम्मालवाड़ी हादसा : 15 साल के किशोर की मौत, बड़ी नानी गंभीर

 

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। हम्मालवाड़ी में बुधवार को मकान गिरने के हादसे के दौरान राहत काम में कौमी एकता की झलक दिखाई दी।। मुस्लिम परिवार मलबे में फंसा तो हिंदू समाज के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। मलबा हटाने में जेसीबी का उपयोग करने से जान के खतरे को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने खुद अपने हाथों से मलबा उठाया और अंदर दबे लोगों को बाहर निकाला। हालांकि अस्पताल में एक किशोर की मौत हो गई। किशोर की बड़ी नानी गंभीर हैं। उनका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

दरअसल, जीवाजीगंज इलाके के हम्मालवाड़ी में मूसा कुरैशी और यूसुफ कुरैशी का दो मंजिला मकान है। दोनों का इंतकाल हो चुका है लेकिन यहां उनका परिवार रहता है जिसमें करीब 10 सदस्य हैं। बुधवार सुबह करीब 10.30 बजे तेज आवाज के साथ अचानक मकान गिर गया। पिछला हिस्सा पहले गिरा। उस वक्त 15 वर्षीय मो. अल्फेज (अरसान) पिता मो. अजहर कुरैशी पीछे था और उसकी 65 वर्षीय बड़ी नानी खुर्शीद बी कुरैशी नीचे थीं। बाकी 8 सदस्य आगे की ओर थे। चपेट में आने मो. अल्फेज की मौत हो गई, जबकि खुर्शीद बी गंभीर घायल है। करीब 4 साल की बालिका को मामूली खरोंच आई। पिछले हिस्से के धमाके के बाद शेष अन्य सदस्य बाहर की ओर भागे और मलबे की चपेट में आए जरूर लेकिन किसी को ज्यादा चोट नहीं आई। जीवाजीगंज थाने के एसआई जीएस राजपूत ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।

Advertisement

पास में ही बन रही दीवार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जो मकान गिरा उसके पास ही फारुख कुरैशी का गोदाम है जो जर्जर स्थिति में है और खाली पड़ा है। उसकी दीवार बनाने का काम चल रहा था जिसके लिए गड्ढे खोदे गए थे। संभवत: इसी से मकान की नींव कमजोर हो गई और मकान अचानक से गिर गया। हालांकि, जो मकान गिरा वह भी करीब 50 साल पुराना है और बताया जा रहा है कि वह भी जीर्णशीर्ण हालत में था।

छुट्टियों में नानी के पास आता था
परिजन शकील अहमद कुरैशी और मो. कासम कुरैशी ने बताया कि मो. अल्फेज कुरैशी जिसे प्यार से अरसान कहते थे, जब तीन साल का था तब उसकी मां की मौत हो गई थी। उसकी छोटी बहन भी है। पिता मो. अजहर कुरैशी इंदौर के चंदननगर में गोसिया मस्जिद के पास रहते हैं और फेरी लगाने का काम करते हैं। अरसान हर साल छुट्टियों में नानी परवीन बी के पास आता था। वह आठवीं क्लास में पढ़ता था और मोहर्रम के बाद इंदौर जाने वाला था। वह बेहद खुशमिजाजा था और सभी कामों में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। मंगलवार रात को ही उसने शर्बत बांटा था। उसकी नानी परवीन बी और खुर्शीद बी रिश्ते में देवरानी-जेठानी हैं।

Advertisement

हिंदू-मुस्लिम नहीं, मानवता रही सबसे पहले

परिजन शकील अहमद कुरैशी और मो. कासम कुरैशी ने बताया कि जब मकान गिरा तो अफरा-तफरी मच गई लेकिन युवाओं ने हिम्मत से काम लिया। अपनी जान पर खेलकर दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए मलबा हटाना शुरू किया। इसी बीच हिंदू समाजजन भी आ गए। एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो कोई कार लेकर आया। बिना देर किए जीवाजीगंज थाने की पुलिस भी टीआई प्रतीक शर्मा के नेतृत्व में पहुंच गई। नगर निगम की जेसीबी को आने में देरी हुई तो टीआई शर्मा खुद एक जेसीबी लेकर आए। ।

हालांकि, बाद में प्रशासनिक और नगर निगम अधिकारी भी पहुंच गए। खास बात यह रही कि मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए सभी अपनी जान पर खेल गए। खुद अपनी जिंदगी दांव पर लगाते हुए उन्हें बाहर निकाला। शकील और कासम कहते हैं पास में ही गणेशजी का मंदिर है और कुछ दूर मस्जिद है। सभी लोग मिलकर रहते हैं, यह आज साबित भी हो गया। परिजन और मुस्लिम समाजजनों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभाने पर जीवाजीगंज पुलिस, हिंदू समाजजन और आसपास के रहवासियों की जमकर तारीफ की।

तारीफ तब अच्छी लगती जब अरसान बच जाता…
रेस्क्यू ऑपरेशन में बेहद महती भूमिका निभाने वाले जीवाजीगंज थाना प्रभारी प्रतीक शर्मा ने अक्षरविश्व से कहा कि लोगों की रक्षा करना ही हमारा काम है और यही हमें सिखाया जाता है। जिस पल मकान गिरा उस दौरान एक-एक पल कीमती था, वहां खड़ा होकर निर्देश देने से कहीं बेहतर था कि मैं भी इसका हिस्सा बनूं और मैंने यही किया।

करीब 25 से 30 मिनट के अंदर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया और 8 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। परिजन और आसपास के लोग भले ही हमारी प्रशंसा कर रहे हैं लेकिन यह तारीफ तब अच्छी लगती जब वह बालक बच जाता। मेरे साथ टीम में एसआई शोभाराम किरार, एएसआई लोकेंद्र सिंह बैस, प्रधान आरक्षक सुनील भदौरिया, सर्वेश भदौरिया, कांस्टेबल दीपांशु, ब्रजेश शर्मा, शंकर सिंह, सैनिक अनिल परिहार शामिल थे।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें