ईवीएम तकनीक पर इनाम जीत चुका है ज्वेलर्स को चूना लगाने वाले गिरोह का मास्टर माइंड

साइबर ठगी की काली कमाई को सोने में बदलने वाले गिरोह का पांचवा सदस्य गिरफ्तार
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। माधवनगर थाना पुलिस ने देशव्यापी साइबर ठगी और सोने के जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड को दिल्ली से पकड़ा है। इस मामले में एक बहुत बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की संभावना है।
पिछले दिनों साइबर ठगी के रुपए से सोना-चांदी खरीदने के मामले में माधवनगर पुलिस ने नर्मदापुरम् के प्रतिष्ठित परिवारों के तीन युवकों को पकड़ा था। इनसे पूछताछ के आधार पर चौथे आरोपी को गोरखपुर से पकड़ा। गिरोह के पांचवें आरोपी प्रियांशु रंजन (22) बिहार को दिल्ली से गिरफ्तार किया है जो चेन्नई के श्रीराम मेमोरियल इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर साइंस में बीटेक है। बुधवार दोपहर आरोपी को कोर्ट में पेश कर तीन जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया है।
बीस हजार डॉलर के इनाम से शुरू हुआ सफर
गिरफ्तार आरोपी प्रियांशु रंजन मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और उसे साइबर व कंप्यूटर का बेहद नॉलेज है। पूछताछ में उसने जो बताया उससे पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। प्रियांशु ने बताया कि साल 2022 में चेन्नई के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान एक विदेशी कंपनी ने ईवीएम को लेकर कुछ जटिल तकनीकी सवाल पूछे थे। प्रियांशु और उसके तीन दोस्तों ने उन सवालों का सही जवाब दिया जिसके बदले कंपनी ने उन्हें बीस हजार डॉलर का बड़ा इनाम बाइनेंस डिजिटल एप के जरिए क्रिप्टो करेंसी यानी यूएसडीटी के रूप में दिया।
उज्जैन से भोपाल तक फैला सर्राफा ठगी का जाल
माधवनगर थाना प्रभारी गजेंद्र पचौरिया के अनुसार यह मामला तब उजागर हुआ जब घासमंडी चौराहा स्थित डीपीके गोल्ड शोरूम के प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। शोरूम के खाते में जैसे ही ठगी की राशि आई तो बैंक ने उसे तुरंत होल्ड कर दिया। पुलिस जांच में पता चला कि दो अन्य ज्वेलर्स के साथ भी यही तरीका अपनाया गया था। उज्जैन पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब राजधानी भोपाल में भी चार बड़े ज्वेलर्स के खाते होल्ड होने की जानकारी सामने आई है और उस ठगी में भी इसी गिरोह का हाथ है।
ऐसे काम करता था यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट
स्टेप 1 साइबर ठगी- मुख्य सरगना यश देश भर में लोगों से साइबर फ्रॉड कर करोड़ों रुपए ऐंठता था।
स्टेप 2 क्यूआर कोड – नर्मदापुरम के तीन युवक (कशिश, राहुल, अनिमेश) गोरखपुर के शौकत के जरिए प्रियांशु को ज्वेलर्स के क्यूआर कोड भेजते थे। प्रियांशु इसे मुख्य ठग यश को फॉरवर्ड करता था।
स्टेप 3 गोल्ड क्वाइन की खरीदी- यश ठगी के बैंक खातों से सीधे ज्वेलर्स के खातों में क्यूआर कोड के जरिए मनी ट्रांसफर करता था। इसके बाद गिरोह के लड़के शोरूम से गोल्ड क्वाइन उठाकर रफूचक्कर हो जाते थे।
अब तक 5 को शिकंजे में ले चुकी है पुलिस
18 जून- नर्मदापुरम के तीन आरोपी कशिश, राहुल उर्फ शानू और अनिमेश को सखीपुरा स्थित होटल हीरा पैलेस से पकड़ा। जेल में बंद हैं। यह तीनों प्रतिष्ठित परिवार के युवक हैं और कमीशन के लालच में जाल में फंस गए।
28 जून- तीनों की जानकारी के आधार पर दिल्ली में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के इंजीनिरिंग छात्र शौकत गौड़ को पैतृक निवासी गोरखपुर से गिरफ्तार किया था जिसे बुधवार को रिमांड खत्म होने पर जेल भेज दिया।
1 जुलाई-शौकत से मिले अहम सुरागों के आधार पर दिल्ली से बीटेक छात्र प्रियांशु रंजन को गिरफ्तार किया। अब पुलिस को बिहार के साइबर ठग यश की तलाश।
मेधावी छात्र कैसे बना साइबर ठगों का मीडिएटर
जब प्रियांशु और उसके दोस्तों ने इसे भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए ऑनलाइन बेचा तो एक खरीदार ने उनके खाते में सात लाख रुपए ट्रांसफर किए। यह राशि आते ही उनका खाता होल्ड हो गया क्योंकि खरीदार ने वह पैसा साइबर फ्रॉड के जरिए कमाया था और खाता कर्नाटक के एक व्यक्ति का था।
कर्नाटक पुलिस की जांच के बाद प्रियांशु के दोस्त तो पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश चले गए लेकिन प्रियांशु के दिमाग में साइबर क्राइम की खिचड़ी पकना शुरू हो गई। बाइनेंस ऐप प्लेटफॉर्म को समझने के लिए गहराई में उतरता गया और जल्द ही कमीशन के लालच में बिहार के बड़े साइबर ठग यश के संपर्क में आकर उनका मुख्य मीडिएटर बन गया।









