सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी

इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उसकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को लेकर उसे प्रथम दृष्टया कुछ आपत्तियां हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी है, इसलिए इस समय जमानत पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। अदालत ने मेघालय सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह पूरी तरह सुनियोजित हत्या का मामला है।
उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की और शव को खाई में फेंक दिया था। घटना के बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई।
टाइपिंग की गलती पर हाईकोर्ट ने दी थी जमानत
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गई थी। उन्होंने इसे महज टाइपिंग की त्रुटि बताया।
मेहता ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी के आधार आरोपी को समझाए थे और ट्रांजिट रिमांड के दौरान भी इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। उनके अनुसार, केवल लिपिकीय गलती के आधार पर जमानत देना उचित नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले सोनम की जमानत याचिका तथ्यों के आधार पर खारिज हो चुकी थी। बाद में इसी तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर राहत दे दी गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी त्रुटि, जिससे आरोपी को वास्तविक नुकसान न हुआ हो, जमानत का आधार नहीं बन सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने सोनम की ओर से पेश वकील से पूछा कि यदि गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे तो शुरुआती जमानत याचिकाओं में यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया।
अदालत ने सवाल किया कि केवल गलत धारा लिखे जाने के आधार पर क्या हाईकोर्ट द्वारा जमानत देना उचित माना जा सकता है। इस पर सोनम के वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण कभी नहीं बताए गए थे।
इस पर अदालत ने कहा कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सोनम रिहा नहीं हुई होती तो उसकी जमानत पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता था।
ट्रायल की धीमी रफ्तार पर भी अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत पर अंतिम फैसला करते समय ट्रायल की प्रगति भी महत्वपूर्ण होगी।
अदालत के सामने बताया गया कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों के बयान ही दर्ज हो सके हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि आगे की सुनवाई में ट्रायल की प्रगति भी ध्यान में रखी जाएगी।
क्या है राजा रघुवंशी हत्याकांड
इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए।
23 मई 2025 को दोनों के लापता होने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की। 3 जून को मेघालय की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ।
जांच में पुलिस ने दावा किया कि यह हत्या पहले से रची गई साजिश का हिस्सा थी। जांच के दौरान सोनम रघुवंशी को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रिहा है।
सोनम ने पहले लगाए थे अफवाह फैलाने के आरोप
इससे पहले सोनम रघुवंशी ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा था कि वह नेपाल नहीं भागी है और शिलॉन्ग में ही रह रही है।
उसने कहा था कि उसके बारे में झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। साथ ही उसने दावा किया था कि वह अदालत की सभी शर्तों का पालन कर रही है और जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग देती रहेगी।









