श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो पश्चिम बंगाल आज भारत का हिस्सा नहीं होता

कार्यकर्ता सम्मेलन में संभाग प्रभारी लता वानखेड़े ने बंगाल क्रांति को समझाया

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज भारत का नक्शा कुछ अलग होता। कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति की चलते पश्चिम बंगाल बंटवारे के दौरान बांग्लादेश में शामिल हो रहा था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विरोध किया और तारकेश्वर में 5 अप्रैल १९47 को बंगाल क्रांति मुक्ति सम्मेलन आयोजित किया जिसमें एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए। जनता के दबाव के कारण निर्णय को बदलना पड़ा। मुखर्जी ने कश्मीर को बचाने के लिए भी परमिट व्यवस्था और धारा 370 का विरोध किया और अपना बलिदान दे दिया। विरोध स्वरूप परमिट व्यवस्था बंद हुई।
जनसंघ संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को कालिदास अकादमी में जिला भाजपा द्वारा आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में यह बात मुख्य वक्ता संभाग प्रभारी लता वानखेड़े ने कही। संबोधित करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं को बताया मुखर्जी ने 1923 में एमए के बाद एलएलबी कर इंग्लैंड से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने।
आत्मनिर्भर भारत अभियान की प्रेरणा मुखर्जी से मिली
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सदस्य बंशीलाल गुर्जर ने कहा जनसंघ संस्थापक डॉ. मुखर्जी ने बंगभंग आंदोलन में भाग लेकर बंगाल को पाकिस्तान जाने से बचाया। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में मुखर्जी उद्योग और आपूर्ति दो विभाग के मंत्री थे। वे सन 1947 से 1950 तक ढ़ाई साल मंत्री रहे और 6 अप्रैल 1949 को राष्ट्रीय उद्योग नीति की घोषणा की। गुर्जर ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के चलते नेहरू और पाकिस्तान के लियाकत अली के बीच समझौता हुआ जिसका पालन ही नहीं किया गया।
मुखर्जी के कार्यों का असर दिख रहा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनिल जैन कालूहेड़ा ने बताया मुखर्जी देशभक्त संगठन के निर्माता थे। 50 साल पहले उन्होंने जो किया उसका असर आज भी दिख रहा है। उन्होंने देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान का विरोध किया। काश्मीर जाने के लिए लागू परमिट प्रथा का विरोध करते हुए गिरफ्तार हुए और अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।
एक घंटा देरी से शुरू हुआ कार्यक्रम
कालिदास अकादमी में रविवार को कार्यक्रम शुरू करने का समय दोपहर 4:30 बजे निर्धारित था परंतु बारिश होने के कारण कई कार्यकर्ता पहुंच ही नहीं पाए। जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित निर्धारित समय से पहले पहुंच गए थे परंतु अन्य अतिथि 5:00 बजे बाद आए। शुरुआत में अकादमी का हॉल खाली दिखने पर स्थानीय वक्ताओं ने चिंता जताई और मंडल पदाधिकारियों को फोन लगाकर कार्यकर्ताओं को बुलाने के निर्देश दिए। करीब 5:30 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ और आधे घंटे बाद कार्यकताओं से हॉल भर गया तब आयोजकों ने चेन की सांस ली।
यह भी थे मंच पर आसीन
कार्यक्रम में महापौर मुकेश टटवाल, राज्यसभा सांसद उमेशनाथ महाराज, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, निगम सभापति कलावती यादव, प्रभुलाल जाटवा, जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित, मुकेश यादव, रूप पमनानी, राजेन्द्र भारती, विवेक जोशी, धनंजय शर्मा, राकेश पंड्या, विवेक गुप्ता, आनंदसिंह खींची सहित जिला पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जानकारी मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने दी।
प्रभारी मंत्री ने परखा कार्यकर्ताओं का ज्ञान
कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने से पहले प्रभारी मंत्री गौतम टटवाल ने कार्यकर्ताओं के ज्ञान को परखा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूर्व के राष्ट्रीय और स्थानीय पदाधिकारियों के नाम पूछे। सही जवाब मिलने के बाद संबोधित करते हुए कहा डॉ. मुखर्जी का जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक जनसेवा क्या होती है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हम एक ऐसे नए भारत में सांस ले रहे हैं जहां उनके बुनियादी और मुख्य सपने साकार हो चुके हैं। सनातन संस्कृति पर जब भी प्रहार हुआ उसके विरोध में समाज खड़ा हुआ है। आदि शंकराचार्य, स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद इसके उदाहरण हैं। इसी कड़ी में डॉ. मुखर्जी का भी नाम है। श्यामाप्रसाद मुखर्जी की नीतियों पर आज भाजपा और नरेंद्र मोदी भी काम कर रहे हैं। राष्ट्र सर्वोपरि है डॉ. मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें या द करना नहीं है ,बल्कि निरंतर उस वैभवशाली और सशक्त भारत का निर्माण करना है जिसके लिए उन्होंने हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।









