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चातुर्मास का आगाज, शुभ कार्यों पर रोक

अब 4 महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम अमृत और ब्रह्म योग के साथ चातुर्मास का होगा शुभारंभ

 

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25 जुलाई को अनुराधा नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में देवशयनी एकादशी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाली देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को बेहद दुर्लभ और शुभ संयोगों के बीच आ रही है। इस तिथि से भगवान श्रीहरि विष्णु 119 दिनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाएंगे। इसके साथ ही पवित्र चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जिसके चलते विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल देवशयनी एकादशी पर अमृत योग, ब्रह्म योग और अनुराधा नक्षत्र का दुर्लभ त्रिवेणी संयोग है। इसके तुरंत बाद देवगुरु बृहस्पति का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करना धर्म, आध्यात्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम समय है। ऐसे में चाातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलेगा।

जानिए व्रत, पूजा और पारण के बारे में
पं. रामचंद्र नायक ने बताया कि पंचांग अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9.12 बजे शुरू होगी। इसकी पूर्णता 25 जुलाई को सुबह 11.34 बजे होगी। शास्त्रों में उदयातिथि की मान्यता सर्वोपरि होने से एकादशी का मुख्य व्रत और पूजन 25 जुलाई को ही होगा। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा सुबह 7. 21 बजे से 9. ०3 बजे तक की जा सकती है। यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। व्रती 26 जुलाई को सुबह 5.39 बजे से 8.22 बजे के बीच व्रत खोल (पारण) सकेंगे।

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मलयागिरि चंदन के लेपन और शयनोत्सव के साथ बदलेगी वैष्णव मंदिरों की दिनचर्या

देवशयनी एकादशी से वैष्णव मंदिरों में सेवा और पूजा का स्वरूप चार महीने के लिए बदल जाएगा। इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण का पुरुषसूक्त के 16 वेदोक्त मंत्रों से षोडशोपचार पूजन और महाअभिषेक किया जाएगा। श्रीसूक्त पाठ से साक्षात माता लक्ष्मी की आराधना होगी। प्रभु को मलयागिरि और कस्तूरी युक्त विशेष चंदन का लेपन कर अलौकिक शृंगार किया जाएगा। महाआरती के बाद भगवान को शयन(सुलाया) कराया जाएगा। गोपाल मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर , महाप्रभु की बैठक सहित वैष्णव देवालयों में विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीसूक्त पाठ और भजन-कीर्तन गूंजेंगे। इसके बाद अगले चार महीनों तक मंदिरों की दिनचर्या चातुर्मास के कड़े नियमों और परंपराओं के अनुसार संचालित होगी, जिसमें भगवान को सात्विक भोग, कथा और सत्संग का क्रम जारी रहेगा।

रवि प्रदोष से बढ़ेगा शिव आराधना का उल्लास
सनातन परंपराओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब संपूर्ण ब्रह्मंड और सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व महादेव (शिव) संभालते हैं। इस वर्ष एकादशी के ठीक अगले दिन यानी 26 जुलाई को रवि प्रदोष का योग बन रहा है, जिससे शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उज्जैन के सभी शिवालयों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और विशेष अनुष्ठानों का सिलसिला तेज हो जाएगा। इसी पावन अवधि के साथ ही आगामी सावन मास की तैयारियां भी जोर-शोर से शुरू हो जाएंगी। चातुर्मास के दौरान भले ही भौतिक मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी, लेकिन मानसिक शुद्धि, तप और ईश्वर भक्ति के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है।

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