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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए 400 पुलिसकर्मी उतरे मैदान में

बाहर से आए 250 जवानों को दी जा रही है शहर के रास्तों और डायवर्जन प्लान की ट्रेनिंग

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहर की यातायात व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस प्रशासन ने मेगा प्लान तैयार किया है। शहर में आए दिन होने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और ट्रैफिक के दबाव से निपटने के लिए अब सड़क पर करीब 400 पुलिसकर्मी मुस्तैद नजर आएंगे। इसके लिए शहर को अलग-अलग आठ जोन में बांटा गया है। यातायात प्रबंधन को मजबूत करने के लिए उज्जैन पुलिस को सिंहस्थ प्रशिक्षण के तहत लगभग 250 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों का बल उपलब्ध कराया गया है। पहले से तैनात 150 कर्मियों को मिलाकर अब 400 पुलिसकर्मी हो गए हैं।

चूंकि यह नया बल बाहरी है, इसलिए उन्हें शहर की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख वीआईपी मार्गों, डायवर्जन प्लान और ट्रैफिक नियमों की विशेष जानकारी दी जा रही है। जवानों को उन पॉइंट्स के बारे में खासतौर पर समझाया जा रहा है, जहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है।यातायात व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों नेे उज्जैन शहर को 8 अलग-अलग जोनों में विभाजित किया है। प्रत्येक की जिम्मेदारी विशेष पुलिस अधिकारी और जवानों को सौंपी है। प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, ताकि कहीं भी जाम की स्थिति निर्मित न हो। यह बल जाम लगने की स्थिति में तुरंत मोर्चा संभाल लेगा।

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नियम तोडऩे वालों पर होगी सख्ती
पुलिस प्रशासन का विशेष जोर ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराने पर रहेगा। जिन चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल हैं, वहां वाहन चालकों को रेड और ग्रीन लाइट के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उल्लंघन करने वाले और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर चालानी कार्रवाई भी होगी।

सिग्नल तोड़ा तो निजी एजेंसी घर आकर वसूलेगी जुर्माना

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यातायात नियमों का उल्लंघन करने में यदि ई-चालान बनता है तो राशि जमा नहीं करने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें अब बढऩे वाली हैं। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने ऐसे डिफाल्टरों से बकाया जुर्माना वसूलने का जिम्मा एक निजी एजेंसी को देने का फैसला किया है। निविदाएं जारी कर दी गई हैं, जिसके लिए इच्छुक कंपनियां 15 दिनों के भीतर आवेदन कर सकती हैं। नए रिकवरी सिस्टम के तहत निजी एजेंसी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह हर बकायादार वाहन मालिक से कम से कम तीन बार संपर्क करे।

वाहन चालकों को घर बैठे ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए लिंक भी भेजी जाएगी। फोन कॉल, वॉट्सएप और ई-मेल के जरिए भी सूचना दी जाएगी। खास बात यह है कि हर कॉल और घर विजिट का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर तीन साल का होगा। एजेंसी के बेहतर प्रदर्शन पर इसे बढ़ाया जा सकेगा। एजेंसी को टेलीकॉलर, फील्ड एग्जीक्यूटिव और प्रोजेक्ट मैनेजर की प्रोफेशनल टीम तैनात करनी होगी। एजेंसी को हर महीने न्यूनतम12 लाख रुपए की वसूली करनी होगी।

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