निर्माण कार्यों के बीच दुर्घटना को न्यौता

अफसर चाहते हैं माहौल सुरक्षित हो, निर्माणकर्ता एजेंसी बनी हंै लापरवाह, लगातार हो रहे हादसे

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। शहर में इन दिनों चहुंओर विकास कार्य और अधोसंरचना निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। लेकिन, विकास की इस चमक के पीछे एक डरावना और स्याह पहलू भी है— सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी। शहर में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा यहां काम करने वाले मजदूरों और आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। अधिकारी चाहते हैं हर साइट पर सुरक्षित माहौल रहे। दूसरी ओर निर्माणकर्ता एजेंसी के नुमांइदों को सुरक्षा कायदों से कोई सरोकार नहीं है। हर साइट पर हादसों को आमंत्रण देने सी स्थिति है।
मंगलवार को ही टाटा की सहयोगी एजेंसी की लापरवाही से चैंबर में उतरे एक कर्मचारी की मौत हो गई और दो मौत के मुहाने से लौटे हैं। इनके पास सुरक्षा साधन नहीं थे। मंगलवार को ही मेला अधिकारी (संभागायुक्त) आशीष सिंह ने बैठक में सभी विभाग के अधिकारियों को साफ शब्दों में सुरक्षा मापदंडों को आवश्यक रूप से अपनाने के निर्देश दिए हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, वे लगभग हर बैठक में ही अफसरों को यह निर्देश देते आए हैं ताकि साइट पर काम कर रहे कर्मचारी और आम जनता की सुरक्षा खतरे में न आए। इनके बाद भी लगभग हर साइट पर हालात खतरनाक है और हादसों को आमंत्रित कर रहे हैं।
सांदीपनि चौराहे से उदयन मार्ग – गड्ढे में भरा पानी
सांदीपनि चौराहे से उदयन मार्ग के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण निर्माण में भी निर्माणधीन सड़क का हिस्सा करीब एक फीट नीचे है और उसमें पानी भर गया है। रात में यहां अंधेरा रहता है। इस गड्ढे में वाहन का पलटना तय है। टू व्हीलर चालक इसकी चपेट में आते हैं तो गंभीर घटना हो सकती है। यहां भी डिवाइडर या संकेतक नहीं लगाए गए हैं।
मंगलनाथ मार्ग – सड़क किनारे खाई
यहां खाक चौक पर सड़क चौड़ीकरण चल रहा है। पुरानी सड़क के साथ जुड़ कर बन रही नई सड़क के बीच न बेरिकेडिंग की गई और न ही कोई संकेतक लगाए गए हैं। पुरानी सड़क से नई सड़क करीब एक फीट नीचे है। रात में यहां अंधेरा रहता है। ऐसे में अगर कोई वाहन चालक गलती से निर्माणाधीन सड़क की ओर जाता है गाड़ी पलट सकती है। इस रोड से रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु गुजरते हैं।
इंदिरा नगर : घरों के बाहर सड़क खोदकर छोड़ दी
करीब एक महीने पहले इंदिरा नगर में नाला बनाने के लिए मेन रोड खोद दी गई। बाद में विवाद की स्थिति बनी तो नाला निर्माण रोक दिया गया। लेकिन खोदा गए नाले को ढंग से फिलिंग नहीं किया गया। अब हालात यह हैं कि हर घर के सामने गहरा गड्ढा है। लोग अपनी जुगाड़ लगाकर आना-जाना कर रहे हैं। पोर्च में रहवासी अपने वाहन नहीं रख पा रहे हैं। रात में सड़क पर खुले में बारिश के बीच गाडिय़ां रखना मजबूरी है। नल कनेक्शन टूट गए जो लोगों ने खुद के खर्च पर मरम्मत करवाए।
आगर रोड : बीच सड़क पर गड्ढा छोड़ दिया
मकोडिय़ा आम इंदिरा नगर से इंदौर गेट तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज के लिए इन दिनों आगर रोड पर निर्माण कर्ता कंपनी मिट्टी की सैंपलिंग कर रही है। इसके लिए जगह-जगह ड्रिलिंग कर गहराई से मिट्टी निकाली जा रही है। सैंपलिंग के बाद उस जगह पर बने गड्ढे को कंपनी ने ऐसे ही छोड़ दिया। अब इसमें उलझकर रोज वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। बीच सड़क पर अचानक गड्ढा सामने आने से वाहन संभालना मुश्किल होता है। आगर रोड पर करीब आधा दर्जन स्पॉट इनके कारण दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं।
लापरवाही का वो ब्लैक स्पॉट जहां थम गईं सांसें
20 जून 2025 (जमालपुरा क्षेत्र, इंदौर रोड)-खाई में गिरने से मौत: कान्ह क्लोज डायवर्शन के तहत चल रहे काम के दौरान सुरक्षा घेरा न होने से एक बड़ा हादसा हुआ। यहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर की गई खुदाई के कारण 20 फीट गहरी खाई में गिरने से बेगमबाग निवासी 39 वर्षीय सुपरवाइजर याकूब कुरैशी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
31 जनवरी 2026 (शांति पैलेस चौराहा)- सरिए के जाल में दबे: फ्लाईओवर निर्माण के दौरान अचानक सरिए का भारी-भरकम जाल भरभराकर गिर गया। कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणों और क्रेन मॉनीटरिंग की कमी के चलते झारखंड से यहां मजदूरी करने आए अशोक गंधे इसके नीचे दब गए और उनकी जान चली गई।
11 फरवरी 2026 (जीवनखेड़ी क्षेत्र)-मिट्टी धंसने से हादसा: घाट निर्माण के दौरान बिना किसी सपोर्टिंग वॉल या मिट्टी रोकने के इंतजामों के ही गहरी खुदाई की जा रही थी। अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा ढहने से डूंगरगांव (बड़वानी) निवासी मजदूर सुरेश मिट्टी में जिंदा दफन हो गए
14 मार्च 2026 (कोयला फाटक से निजातपुरा मार्ग)- इलेक्ट्रिक वर्क में करंट: सड़क चौड़ीकरण कार्य में सुरक्षा की बुनियादी चूक सामने आई। बिना बिजली बंद कराए या बिना इंसुलेटेड किट के इलेक्ट्रिक कार्य कराया जा रहा था। करंट की चपेट में आने से खड़ोतिया निवासी राकेश सूर्यवंशी ने दम तोड़ दिया।
13 मई 2026 (हरिफाटक फोरलेन मार्ग)-तीसरी मंजिल से गिरे: यूडीए द्वारा बनाए जा रहे यूनिटी मॉल की तीसरी मंजिल पर बिना किसी सेफ्टी नेट और लाइफ-बेल्ट के निर्माण कार्य चल रहा था।पंजाब के होशियारपुर निवासी 26 वर्षीय मनिंदर की ऊंचाई से गिरने से मौत हो गई।
7 जुलाई 2026 (पिपलीनाका)- गैस से मौत: पिपली नाका पर चैंबर में उतरने पर जहरीली गैस से श्रमिक अशोक की मौत हो गई। घटना के वक्त उसने कोई भी सुरक्षा मानक नहीं अपनाए थे। दो अन्य श्रमिक भी बचाने के दौरान बेहोश हो गए।
आखिर कैसे मिलेगी सेफ्टी ?
ये हादसे सामान्य दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि साफ तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों की मॉनीटरिंग की विफलता हैं। नियम कहते हैं कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में सेफ्टी ऑडिट और साइट सुपरविजन अनिवार्य है। लेकिन उज्जैन के इन प्रोजेक्ट्स में न तो मजदूरों के पास हेलमेट, बेल्ट या सेफ्टी शूज दिखते हैं और न ही खतरनाक जगहों पर कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग की जाती है।









