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योगिनी एकादशी 2026: पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा पाने का पावन अवसर

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 10 जुलाई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। कुछ वैष्णव परंपराओं में गौण (Gauna) योगिनी एकादशी 11 जुलाई को भी मनाई जाती है।

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योगिनी एकादशी का महत्व

सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। पद्म पुराण में इस एकादशी का अत्यंत महात्म्य वर्णित है।

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पूजा विधि

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।

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स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।

पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।

विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।

दिनभर सात्विक भाव से व्रत रखें तथा रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें।

योगिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार कुबेर के पुष्पों की सेवा करने वाले माली हेममाली ने अपने कर्तव्य में लापरवाही की, जिससे उसे श्राप मिला। बाद में ऋषि के निर्देशानुसार उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उसे श्राप से मुक्ति मिली और पुनः सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। यही कारण है कि इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली और मोक्षदायिनी माना जाता है।

व्रत का फल

भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पापों का नाश और मानसिक शांति मिलती है।

रोग, दुःख और नकारात्मकता दूर होती है।

परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।

आध्यात्मिक उन्नति एवं मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

शुभकामना संदेश

“योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान श्रीहरि विष्णु आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करें। आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का सदैव वास हो। योगिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!”

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