उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सुविधाघर नहीं, यात्री होते हैं परेशान

रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति सदस्य ने शौचालय निर्माण की मांग उठाई
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रतलाम मंडल के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन (प्लेटफॉर्म के हिसाब से) उज्जैन के प्लेटफॉर्म पर सुविधाघर की कमी यात्रियों की परेशानी का सबब बन गई है। रोजाना दस हजार से ज्यादा यात्री यहां से सफर करते हैं।
रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य राजेश शर्मा ने बताया स्टेशन पर 8 प्लेटफॉर्म हैं। लेकिन सुविधाघर सिर्फ प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 8 पर ही हैं। वह भी वेटिंग हॉल में हैं। जिसके बारे में सभी को जानकारी नहीं है। प्लेटफॉर्म नंबर 2, 3, 4, 5, 6 एवं 7 पर एक भी शौचालय नहीं है। जबकि इन सब पर बड़ी संख्या में ट्रेनों का आना-जाना है। ऐसे में यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। उनके सामने प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 8 पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।
समिति सदस्य शर्मा कहते हैं कि डायबिटीज पेंशेंट को बार-बार लघुशंका के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में इन प्लेटफार्म से यात्रा करते समय उन्हें काफी परेशान होना पड़ता है। खासकर उस दौरान जब ट्रेन का इंतजार लंबा हो जाए। ऐसी स्थिति में यात्रियों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। मजबूरन यात्रियों को प्लेटफॉर्म क्रमांक 1 अथवा 8 के भोपाल छोर तक जाना पड़ता है, जिससे यात्रियों को लंबी दूरी, ट्रेन छूटने का डर और असुविधा का भी सामना करना पड़ता है।
इन्हें होती हैं सबसे ज्यादा दिक्कत
सुविधाघर नहीं होने से सबसे ज्यादा दिक्कत दिव्यांगजन, सीनियर सिटीजन, प्रसूता, छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवार और मरीजों को होती है। कई बुजुर्ग एवं दिव्यांग लंबी दूरी तक चलने में सक्षम नहीं होते, फिर भी उन्हें मजबूरी में एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाना पड़ता है।
कई पत्र लिखें, पर समस्या ज्यों की त्यों
शर्मा ने बताया कि रेलवे प्रशासन का कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से समस्या की तरफ ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि यात्रियों की सबसे बुनियादी आवश्यकता की लगातार अनदेखी की जा रही है। उज्जैन देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
पहली छाप ही रेलवे स्टेशन से बनती है। ऐसे में यदि यात्रियों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो तो भारतीय रेलवे की छवि के साथ-साथ उज्जैन शहर की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। शर्मा ने रेलवे प्रशासन से सिंहस्थ को देखते हुए प्लेटफॉर्म 2, 3, 4, 5, 6, 7 तथा 8 पर नागदा छोर पर आधुनिक एवं स्वच्छ शौचालयों का निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर करने की मांग की है। स्थायी शौचालयों निर्माण नहीं होने तक अस्थायी अथवा पोर्टेबल शौचालयों की व्यवस्था करने की मांग की है।
पे एंड यूज अथवा बीओटी प्लान
शर्मा ने शौचालयों निर्माण एवं संचालन पे एंड यूज़ अथवा बीओटी मॉडल से करने का सुझाव दिया है। इससे रेलवे पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और यात्रियों को स्वच्छ शौचालयों की सुविधा उपलब्ध होगी।









