टेंडर जारी करने के बाद परिषद में आए प्रस्ताव विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष ने भी उठाए सवाल

नगरनिगम का विशेष सम्मेलन
हिदायतों के साथ सभी 26 प्रस्ताव स्वीकृत
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। टेंडर जारी करने के बाद परिषद् में स्वीकृति का प्रस्ताव लाए जाने के कारण मंगलवार को नगरनिगम के सम्मेलन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए। मुद्दे को ठीक मानते हुए निगम अध्यक्ष ने भी अफसरों को हिदायत दी कि अगली बार प्रस्ताव रखते समय इस बात का ध्यान रखें ताकि शंका कुशंका की स्थिति नहीं बने। हालांकि परिषद ने सभी 26 प्रस्तावों को पास कर दिया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तीन प्रस्ताव टीडीआर खरीदी लोन , देवासरोड स्वीमिंग पूल का ठेका और सीबीजी गैस संयंत्र स्थापना के हैं। निगम के विशेष सम्मेलन में यूं तो 26 प्रस्ताव थे, लेकिन चर्चा प्रस्ताव नंबर 7, 16 और 26 पर ही केंद्रित रही।
देवासरोड स्वीमिंग पूल निजी फर्म को
एजेंडे में 7 वें नंबर पर देवास रोड स्थित स्वीमिंग पूल निजी फर्म को देने का प्रस्ताव था। इसका टेंडर सोमवार को ही जारी हुआ था। चार लोगों ने टेंडर भी डाल दिया है। वार्ड 52 की पार्षद सुलेखा वशिष्ठ ने इस पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब टेंडर हो चुका है तो अब स्वीकृति क्यों ? वशिष्ठ ने महिलाओं के चेजिंग रूम नहीं होने और अलग टाइम का मुद्दा भी उठाया। भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने इस पर बचाव में मोर्चा संभाला और बताया कि स्वीमिंग पूल के लिए महिलाओं का अलग टाइम भी है और चेजिंग रूम भी।
यह प्रस्ताव पारित
जीर्णशीर्ण शौचालयों को तोड़कर दो नए शौचालय का निर्माण और एक यूरिनल को हटाने की स्वीकृति।
सिंहस्थ रोड चौड़ीकरण प्रभावित गदापुलिया- जयसिंहपुरा- लालपुल, वी.डी. मार्केट- तेलीवाडा, ढाबारोड- छोटी पुलिया , गाडी अड्डा चौराहे से बडापुल, हरिफाटक मार्ग से महाकाल पार्किंग, गेल इंडिया चौराहे से नीलगंगा, शांति नगर से मंछामन चौराहा, सांवेर रोड़ मुनि नगर से सार्थक नगर इंदौर रोड़, हामूखेडी बिजासन माता मंदिर से देवासरोड़, 12 खोली के 41 मकान प्रभावितों को 5 करोड़ के मुआवजा की स्वीकृति।
निर्माणाधीन अलखधाम शॉपिंग काम्पलेक्स के नामकरण का प्रस्ताव स्वीकृत।
नजरअली स्वीमिंग कॉम्पलेक्स स्वीमिंग अकादमी के लिए खेल और युवा कल्याण विभाग को ट्रांसफर करने की मंजूरी।
सीबीजी संयंत्र के नए टेंडर
सम्मेलन में सबसे ज्यादा बहस एजेंडा नंबर १६ पर हुई। स्वच्छता समिति प्रभारी सत्यनारायण चौहान ने सीबीजी (कंप्रेस्ड बायो गैस) संयंत्र स्थापना गेल से लेकर पीपीपी मोड में दूसरी एजेंसी को देने का प्रस्ताव रखा। नेता प्रतिपक्ष रविराय ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 60 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) के तहत बनेगा। इसमें 33 फीसदी राशि केंद्र सरकार, 33 फीसदी राज्य सरकार और 34 फीसदी राशि नगरनिगम देगी। निगम यह राशि क्यों खर्च करें।
बहस क्यों- चौहान ने बताया था कि निगम की हिस्सेदारी प्रोजेक्ट लगाने वाली कंपनी देगी, जबकि एमआईसी के ठहराव में यह राशि निगम से चुकाने का जिक्र था। इस पर राय ने सवाल उठाया कि हम आखिर 18 करोड़ जैसी भारी-भरकम रकम खर्च क्यों करना चाहते हैं। दूसरा सवाल उन्होंने टेंडर जारी करने पर उठाया। संयंत्र स्थापना का टेंडर भी सोमवार को ही जारी हुआ था और चार कंपनियों ने इसमें रुचि भी ली। भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने भी स्वीकृति से पहले टेेंडर जारी करने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब 2024 से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है तो अब इतनी जल्दी क्यों है? गेल ने कौनसी शर्तें जोड़ी, जिसकी वजह से उसे बाहर करना पड़ा।, टेंडर जारी हो गए तो प्रस्ताव स्वीकृति अब सदन क्यों ?।
निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि प्रोसेस तेजी से पूरी करने के लिए टेंडर कॉल किए थे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि निगम को अपनी तरफ से कोई राशि नहीं देनी होगी। उन्होंने सदन को आश्वस्त भी किया कि टेंडर की शर्तें नगरीय विकास विभाग के अनुरूप हैं और यह नगरनिगम के हित में हैं। उज्जैन तेजी से विकसित हो रहा है और शहर से निकलने वाले कचरे के निष्पादन के लिए बायो गैस संयंत्र की स्थापना जरूरी है।
यह व्यवस्था दी- निगम सभापति कलावती यादव ने हिदायत के साथ प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि अगली बार से प्रस्ताव पारदर्शी तरीके से ही रखा जाए, ताकि शंका-कुशंका की स्थिति नहीं बने। इस प्रस्ताव को भी इस शर्त के साथ पारित किया जाता है कि निगम अपना योगदान नहीं देगा।
टीडीआर खरीदी के लिए लोन
सबसे चर्चित मुद्दा टीडीआर (ट्रांसफरबेल डेवलपमेंट रिसिप्ट) का था। विपक्ष के उपनेता गब्बर कुवाल ने पूछा कि टीडीआर क्या है, इसे खरीदने की जरूरत क्यों है? सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी अनिल गुप्ता ने टीडीआर क्या है और इसकी खरीदी क्यों जरूरी है पर अपनी बात रखी, लेकिन वह विषय को ठीक से समझा नहीं सकें। पार्षद नीलम कालरा और आशिमा सेंगर भी पक्ष की तरफ से बोलीं, पर उनके भी फंडे साफ नहीं थे।
ऐसे में नेता प्रतिपक्ष रवि राय को घेरने का मौका मिल गया और उन्होंने टीडीआर खरीदी के लिए २०० करोड़ के लोन पर घेराबंदी कर दी। राय ने कहा कि निगम भारी-भरकम लोन का बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। टीडीआर निगम कैसे बेचेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सीएम डॉ. मोहन यादव के जरिये टीडीआर खरीदी राशि सरकार से लेने का हवाला दिया। हालांकि किस्तों में लोन लेने की शर्त पर प्रस्ताव मंजूर हो गया।
पार्षद तिवारी को मिली 18 नंबर सीट, महापौर ने पास बैठाया
विशेष सम्मेलन में सबकी निगाह पार्षद शिवेंद्र तिवारी की बैठक व्यवस्था पर थी। पूर्व के सम्मेलन में वह महापौर मुकेश टटवाल के बगल में सीट नंबर 2 पर बैठते थे। एमआईसी से हटने के बाद उन्हें सीट नंबर 18 अलॉट की गई थी। तय समय पर वह अपनी सीट पर बैठ भी गए थे। पर चर्चा शुरू होते से ही महापौर ने उन्हें इशारा कर अपने पास बुलाया और बगल में बैठाया। यहीं से बैठकर जब सदन में सत्ता पक्ष के लिए स्थिति असहज हुई तो उन्होंने बचाव किया। इस बीच निगम अध्यक्ष कलावती यादव ने भी उन्हें सीबीजी मसले पर फैसला देने से पहले मशविरे के लिए अपने पास बुलाया।
पहली बार हिदायत
अब तक हुए सम्मेलन में निगम अध्यक्ष कलावती यादव आसानी से व्यवस्था देती रही हैं, पर इस परिषद में पहली बार था जब उन्होंने अफसरों को प्रस्ताव रखते समय सावधानी रखने की हिदायत दी। हालांकि बीच-बीच में सदन में जैसे ही माहौल गरम हुआ, उन्होंने सधे अंदाज में शालीनता से दोनों पक्षों को शांत कराया।
महाकाल-हरसिद्धि मार्ग के नामकरण का मसला
सदन में पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने महाकाल- हरसिद्धि मार्ग का नाम पं. सूर्यनारायण व्यास मार्ग रखने का पूरक प्रस्ताव रखा। इसे एमआईसी के माध्यम से सदन में लाने का सुझाव दिया गया।









