पहली सवारी : बटुकों ने मंत्रोच्चार से किया राजाधिराज का अर्चन, शिप्रा तट पर दिखा अद्भुत नजारा

श्री मनमहेश के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब
सावन के पहले सोमवार पर भोले के भक्तों का रिकार्ड टूटा, सवारी के 8 लाख ने किए दर्शन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सावन के प्रथम सोमवार पर धर्मनगरी उज्जैन शिवभक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आई। भगवान श्री महाकालेश्वर की पहली सवारी पूरे पारंपरिक वैभव और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। भगवान महाकाल पहली सवारी में मनमहेश स्वरूप में रजत पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया, जबकि पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष निरंतर गूंजते रहे। मंदिर समिति के अनुसार सवारी मार्ग पर लगभग आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किया।

सवारी प्रारंभ होने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का षोडशोपचार पूजन, अर्चन और आरती हुई। वैदिक विधि-विधान से हुए इस पूजन के बाद भगवान महाकाल को नगर भ्रमण के लिए रजत पालकी में विराजमान किया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सशस्त्र पुलिस बल ने भगवान मनमहेश को गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धा प्रकट की।
इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, महानिर्वाणी अखाड़े के श्री महंत विनीतगिरि महाराज, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन कर आरती में सहभागिता की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामघाट पर था अदभुत नजारा

सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान मनमहेश का वैदिक रीति से अभिषेक एवं पूजन किया गया। पहली सवारी में बटुकों का वैदिक मंत्रोच्चार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यह इस सवारी का थीम था। रामघाट पर मौजूद 1100 बटुकों ने एक स्वर में भगवान महाकाल का वैदिक मंत्रों से अर्चन किया। आगामी सभी सवारियां भी अलग-अलग विषयों की थीम पर निकाली जाएंगी। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
भजन मंडलियों में दिखा विशेष जोश
सवारी में शामिल होने आई करीब एक दर्जन से अधिक भजन मंडलियों में विशेष उत्साह देखा गया। लोग तरह तरह के धार्मिक स्वरूप में भजन मंडलियों में शामिल हुए। सवारी के दौरान सड़कों पर श्रद्धालु घंटों पहले से अपनी जगह सुरक्षित कर भगवान महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए। पूरा शहर शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया और वातावरण भक्तिमय उद्घोषों से गूंजता रहा।
चलित रथ पर सवारी का सीधा प्रसारण
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा विशेष चलित रथ की व्यवस्था की गई थी। रथ पर लगी विशाल एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शाही सवारी का सीधा प्रसारण किया गया, जिससे दूर खड़े श्रद्धालु भी भगवान महाकाल के दर्शन कर सके। पूरे सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान महाकाल का भव्य स्वागत किया। सवारी मार्ग पर आकर्षक रंगोलियां सजाई गई थीं।

अगली सवारी अब 10मार्च को
परंपरा के अनुसार सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। इस वर्ष सावन मास में चार तथा भाद्रपद माह में दो शाही सवारियां निकाली जाएंगी। अगली सवारी अब १० अगस्त को निकलेगी जिसकी थीम के मुताबिक इसमें तमाम लोक नृत्य दल शामिल होंगे।
मंदिर में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़
सावन के पहले सोमवार को महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। सोमवार शाम तक लगभग चार लाख चालीस हजार श्रद्धालुओं ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए। जबकि पट बंद होने तक ६ लाख १३ हजार ८४९ श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए। जो कि एक रिकार्ड है।









