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विदेशी जोड़ों को भाया भारत, वैदिक रीति से रचाई शादी

उज्जैन। विदेशी जोड़ों को भारतीय संस्कृति भा रही है। ऐसे में वे भारत आकर वैदिक रीति से विवाह कर रहे हैं। रविवार को आनंदमय वेलनेस रिट्रीट में तीन विदेशी जोड़ों ने वैदिक रीति से शादी की। उज्जैन में भारतीय संस्कृति और भक्ति योग परंपरा का अद्भुत नजारा इस दौरान दिखाई दिया।

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मोक्षदायिनी मां शिप्रा के किनारे स्थित आनंदमीय वेलनेस रिट्रीट में डॉ. ओमानंद जी महाराज के सानिध्य में हुए मांगलिक आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि भारतीय परंपरा को अपनाने वाले विदेशी साधकों को नए सनातन नाम भी दिए गए।
इटली की ईवा (मां दर्पण आनंद) ने मैसिमिलियानो (बलराम आनंद) व जेसिका (मां सीता आनंद) ने लुका (राम आनंद) के साथ फेरे लिए। स्पेन की इनमा (मां शांति आनंद) इंग्लैंड के मार्क (प्रकाशानंद) के साथ परिणय सूत्र में बंधीं। आश्रम परिसर में हुई वैदिक शादी में सनातन रीति-रिवाजों का विधि-विधान से पालन किया गया।

मंत्रों से गूंजा आश्रम परिसर
विवाह समारोह में भारतीय संस्कृति का हर अक्स नजर आया। पूरी भव्यता के बीच मंत्रों के बीच विदेशी युगलों ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लिए तो मौजूद हर भारतीय गौरव से भर गया।
इससे पहले आश्रम परिसर में ही बरात निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ढोल की थाप पर भारतीय बाराती झूमते- नाचते निकले।

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भारतीय दर्शन में विवाह समझौता नहीं, दिव्य संबंध
डॉ. ओमानंद गुरु ने सनातन संस्कृति की गहराई और विवाह संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाश्चात्य देशों में विवाह कानूनी अनुबंध होता है, जबकि भारतीय दर्शन में विवाह दो आत्माओं का दिव्य संबंध होता है। यह भारतीय जीवन पद्धति के16 संस्कारों में से 15वां और सबसे पवित्र पाणिग्रहण संस्कार है। यह जीवन में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
शिक्षा लेने आए थे,

जीवन मूल्य अपना लिए
विवाह बंधन में बंधे तीनों जोड़े डॉ. ओमानंद से शिक्षा लेने आए थे। वे योग और ध्यान सीख रहे थे। भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कारों और आपसी सम्मान से वे इतने प्रभावित हुए कि वैदिक परंपरा अनुसार विवाह करने का फैसला कर लिया।

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