कागज में फंसी खड़े हनुमान टकसाली मंदिर की शिफ्टिंग

पार्षद तिवारी ने जमीन आवंटन को लेकर पूछा सवाल
उज्जैन। कंठाल चौराहा-छत्रीचौक सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे खड़े हनुमान-टकसाली मंदिर की शिफ्टिंग का मसला कागज में अटक गया है। पुजारी महेश बैरागी ने बगैर कागज मिले नई जगह पर मंदिर ले जाने से साफ तौर पर इंकार कर दिया है। इधर, पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने महापौर मुकेश टटवाल को पत्र सौंपकर जमीन आवंटन को लेकर सवाल पूछा है।
दरअसल, कंठाल चौराहा-छतरीचौक मार्ग चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे पांच मंदिरों में से तीन के विस्थापन में तो निगम को कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन खड़े हनुमान मंदिर और टकसाली गणेश मंदिर के स्थानांतरण में परेशानी आ रही है। पुजारी नई जगह जाने को तैयार हो गए थे लेकिन कागज पर आकर मामला फंस गया। पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि उनका चार पीढ़ी मंदिर की सेवा कर चुकी है। रियासत काल के कागजात भी है। हम हटने को तैयार भी है लेकिन जिस नई जगह पर भेेजा जा रहा है, वहां के दस्तावेज तो दिए जाए।
पार्षद ने पूछा- कॉम्प्लेक्स की जमीन पर मंदिर निर्माण क्यों ?
पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने महापौर मुकेश टटवाल को पत्र सौंपा है। इसमें कॉम्प्लेक्स की जमीन पर मंदिर निर्माण को लेकर सवाल किए हैं। तिवारी ने पूछा है दोनों मंदिरों को जिस जगह स्थानांतरित किया जा रहा है, उस जगह पर कमॢशयल कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित है। ऐसे में यहां निगम मंदिरों का निर्माण कैसे करवा रहा है? क्या एमआईसी या निगम परिषद् ने उक्त जमीन मंदिरों का आवंटित कर दी है?
प्रश्न यह है कि धार्मिक स्थलों को हटाने, विस्थापन करने, नवनिर्माण करने की अनुमति देने का अधिकार क्या नगरनिगम को है? मौजूदा समय में टंकी चौक पर निर्माण किसकी सहमति से किया जा रहा है? खड़े हनुमान मंदिर में जो तोडफ़ोड़ हुई है, वह किसके आदेश और सहमति से हुई है? जिन धार्मिक स्थलों को हटाया गया, या हटाया जाना है, उसकी स्थिति स्पष्ट कीजिए? खड़े हनुमान मंदिर को हटाने में निगम की भूमिका स्पष्ट की जाना चाहिए, क्योंकि मौजूदा समय में नगरनिगम में भाजपा का बोर्ड हैं।









