खेत के रास्ते से निकलने की बात पर खून-खराबा, चार लोग घायल

सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, पुलिस बोली-आपस में हुआ समझौता
अक्षरविश्व न्यूज नागदा। पुलिस सोशल मीडिया पर चलने वाले वीडियो के आधार पर मुकदमा दर्ज करती है। खून-खराबे पर खुद पार्टी बनती है और केस दर्ज कर हमलावरों को हिरासत में लेती है। पिपलौदा सागौतीमाता में खेत के रास्ते से निकलने की बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। कहासुनी के बाद एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर पाइप से हमला कर दिया। महिला सहित चार घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने यह कह कर हाथ खड़े कर दिए कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार पिपलोदा सागौती माता निवासी राजेंद्रसिंह और नागू सिंह डोडिया के मध्य रास्ते को लेकर विवाद की स्थिति बीते तीन सालों से चल रही है। 2025 में मामला तहसील न्यायालय पहुंचा था। जहां तहसील न्यायालय ने आदेश दिया था कि आवेदक राजेंद्र सिंह के खेत तक आवागमन का रास्ता अनावेदक नागूसिंह के खेत की मेढ़ से जाता है, इसलिए राजेंद्र सिंह के आवागमन में कोई बाधा उत्पन्न न की जाए। सोमवार को राजेंद्र सिंह के खेत में सोयाबीन पकने पर उसकी कटाई के लिए हर्षित डोडिया ट्रैक्टर लेकर पहुंचा था। इस पर नागू सिंह ने उसे रोका और दोनों के बीच कहासुनी हुई।
जब हर्षित ट्रैक्टर लेकर लौट रहा था, तब दोबारा विवाद हो गया। हर्षित ने मीडिया को बताया कि नागू सिंह, अर्जुन और विजय ने पाइप से हमला कर दिया। जिसमें हर्षित, भाई चैन सिंह, मां आशा कुंवर और चाचा दरबार सिंह घायल हो गए। जो बिरलाग्राम थाने पहुंचे, जहां से उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल लाया गया। यहां उपचार के बाद वह थाने के लिए रवाना हुए थे। बिरलाग्राम पुलिस थाना प्रभारी जितेंद्र पाटीदार ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है, इसलिए फरियादी पक्ष मेडिकल के बाद थाने आया ही नहीं।
मामले की गंभीरता को पुलिस ने भी अनदेखा किया है, क्योंकि महिला के कपड़े पूरी तरह से खून से सने हुए थे। रास्ते की बात को लेकर विवाद हुआ। जो लोक न्यूसेंस का मामला है। जब फरियादी थाने पहुंचे और बाद में मेडिकल पर भी गए तो पुलिस ने दोबारा फरियादी को क्यों नहीं बुलाया और अब समझौता होने की बात कहीं जा रही है। विवाद तीन साल से चल रहा है, अगर कोई बड़ा मामला रास्ते की बात को लेकर हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा।


