रूस की लैब में प्लेग बैक्टीरिया से हादसे की खबर, 197 लोग निगरानी में

कोरोना महामारी के बाद किसी भी संक्रामक बीमारी से जुड़ी खबर लोगों की चिंता बढ़ा देती है। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए कथित लैब हादसे के बाद ऐसी ही स्थिति बनी है। रिपोर्टों के मुताबिक, यहां काम करने वाली 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक की संदिग्ध प्लेग संक्रमण के बाद मौत हो गई। इसके बाद करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। हालांकि, शुरुआती जांच में निगरानी में रखे गए लोगों में संक्रमण के लक्षण सामने नहीं आए हैं। ऐसे में फिलहाल इसे किसी नए प्रकोप के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
कैसे हुआ हादसा?
रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना इरकुत्स्क क्षेत्र के एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई। बताया गया है कि महिला वैज्ञानिक फील्ड ट्रिप से लौटने के बाद लैब में सैंपल पर काम कर रही थीं। इसी दौरान जीवित प्लेग बैक्टीरिया वाले सैंपल की टेस्ट ट्यूब टूट गई। कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और 2 अक्टूबर 2026 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके संपर्क में आए कर्मचारियों और सहयोगियों को निगरानी में रखा गया।
कितना खतरनाक है प्लेग?
प्लेग एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो Yersinia pestis नाम के बैक्टीरिया से होती है। इसका इलाज एंटीबायोटिक्स से संभव है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी जानलेवा हो सकती है। प्लेग के अलग-अलग प्रकार होते हैं। इनमें बुबोनिक प्लेग सबसे आम है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है। न्यूमोनिक प्लेग संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। इसलिए इसके संदिग्ध मामलों में जल्दी पहचान और इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इतिहास में लाखों लोगों की जान ले चुका है
प्लेग का इतिहास काफी पुराना है। 14वीं सदी की ब्लैक डेथ महामारी ने यूरोप समेत कई क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। इतिहासकारों के अनुसार, उस दौर में करोड़ों लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भी अलग-अलग समय पर प्लेग के प्रकोप सामने आते रहे। 19वीं सदी के अंत में शुरू हुई तीसरी बड़ी प्लेग महामारी भारत समेत कई देशों तक पहुंची और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। हालांकि, आज के समय में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और प्रभावी एंटीबायोटिक्स के कारण प्लेग का इलाज संभव है।
रूस में बढ़ाई गई निगरानी
महिला वैज्ञानिक की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है और कुछ अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। अभी तक निगरानी में रखे गए लोगों में संक्रमण के लक्षण सामने नहीं आने की बात कही गई है। इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि स्वास्थ्य अधिकारी संभावित संपर्कों की निगरानी कर रहे हैं और संक्रमण फैलने की किसी भी आशंका को रोकने की कोशिश की जा रही है।









