32 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद तीन साल में 41,526 सीटें खाली

संसाधनों की कमी से प्रभावित दाखिले
गुणवत्ता, प्लेसमेंट और रोजगार के अवसरों की कमी से बदला छात्रों का रुझान
अक्षरविव न्यूज भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2018 से अब तक प्रदेश में 32 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। वहीं 2023 से 2026 के बीच बीई और बीटेक की 41,526 सीटों पर दाखिले नहीं हुए। हालांकि पिछले साल की तुलना में खाली सीटों में 28 प्रतिशत की कमी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार छात्र इंजीनियरिंग से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि कॉलेज और विषय का चयन करते समय पढ़ाई की गुणवत्ता, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को अधिक महत्व दे रहे हैं।
कई निजी संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई। नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (एनबीए) और एआईसीटीई के मानकों को पूरा करना भी कई संस्थानों के लिए चुनौती बना हुआ है। वहीं कमजोर प्लेसमेंट और कंपनियों की कम कैंपस भागीदारी से छात्रों का भरोसा कम हुआ है।
सीएसई, एआई और डेटा साइंस की बढ़ी मांग
छात्र अब कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा साइंस जैसे विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसी शाखाओं में कई जगह सीटें खाली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन शाखाओं की उपयोगिता कम नहीं हुई है। निर्माण, अधोसंरचना और विनिर्माण क्षेत्रों में इनकी मांग बनी हुई है, लेकिन पाठ्यक्रमों को नई तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोडऩा जरूरी है।
डिग्री के साथ कौशल पर जोर
आज छात्र केवल डिग्री के बजाय कौशल, इंटर्नशिप और नौकरी की संभावनाओं को भी देखते हैं। ऐसे में कॉलेजों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण, आधुनिक लैब और बेहतर प्लेसमेंट पर ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार कॉलेजों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने, प्लेसमेंट रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, इंटर्नशिप को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने और एआई, रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों को शामिल करने की दिशा में काम करना चाहिए।









