वेस्ट को बेस्ट में बदलने की तैयारी, सीबीजी प्लांट लगेगा, गैस बेचकर की जाएगी कमाई

एमआईसी : मुआवजा, कार्यपालन यंत्री की पदस्थापना सहित कई प्रस्तावों को मिली मंजूरी
दो स्वीपिंग वाहनों की खरीदी की जाएंगी तीन साल तक विक्रय करने वाली फर्म करेगी संचालन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नगरनिगम उज्जैन वेस्ट (बायो कचरा, नारियल कचरा, कपड़े और फुटवियर) को बेस्ट में बदलने की कवायद कर रहा है। इस कड़ी में वह सीबीजी (कंप्रेस्ड बायो गैस) प्लांट लगाएगा। प्लांट में तैयार होने वाली गैस बेचकर कमाई की जाएगी।इसी तरह पुराने कपड़ों से फाइल कवर और अन्य सामग्री तैयार की जाएगी। नारियल कचरे का भी उपयोग करने की योजना है। इसके लिए भी प्लांट लगाया जाएगा। शहर को एयर डस्ट से मुक्ति दिलाने के लिए दो नए स्वीपिंग वाहन खरीदे जाएंगे।
मंगलवार को महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता में एमआईसी ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें वेस्ट से बेस्ट बनाने के प्रस्ताव प्रमुख थे।
इन मुद्दों पर विचार और मंजूरी
प्रमोद मालवीय को बतौर कार्यपालन यंत्री संविदा नियुक्ति दी गई।
2 सीएनजी चलित रोड़ स्वीपिंग वाहन खरीदे जाएंगे। 3 सालों तक इनका संचालन व रखरखाव संबंधित एजेंसी को करना होगा।
चौड़ीकरण और नई सड़क निर्माण से प्रभावित हो रहे २५ लोगों को २.४७ करोड़ का मुआवजा स्वीकृत किया गया। इनमें गदापुलिया- इंदौर रोड सड़क, गेल इंडिया- नीलगंगा चौराहा, शांति नगर चौराहा- मंछामन कॉलोनी , कोयला फाटक-छत्रीचौक, हरसिद्धि पाल- रामघाट , वीडी मार्केट- तेलीवाडा से छोटी पुलिया मार्ग के प्रभावित शामिल हैं।
पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड कोकोनट वेस्ट रीसाइक्लिंग और फुटवियर वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट बनेंगे। एजेंसी चयन के लिए ई निविदा आमंत्रित की जाएगी।
बॉयो वेस्ट से सीबीजी तैयार करने के लिए घट्टिया तहसील के डबरी में प्लांट लगाया जाएगा। इसका निर्माण भी पीपीपी मोड पर होगा। यह स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत बनेगा।









