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पहली बार महाकालेश्वर मंदिर का रिनोवेशन और रिहैबिलिटेशन करने की तैयारी, बनने लगा मचान

स्टीम वाश से चमकेगा शिखर… 10.27 करोड़ रुपयों से महाकाल मंदिर आने वाले कई बरसों तक होगा मजबूत

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अयोध्या मंदिर में नींव की डिजाइन बनाने वाली केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की देखरेख में होगा काम

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। दुनियाभर के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र महाकाल मंदिर अब स्टीम वाश से चमक उठेगा। परिसर के सभी मंदिर भी नया रंग रूप लेंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर के शिखर पर मचान बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। अगली शिवरात्रि तक यह काम पूरा होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन 10.27 करोड़ रुपए खर्च करेगा।

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महाकाल मंदिर के इतिहास में पहली बार मंदिर का रिनोवेशन होने जा रहा है, जिससे मंदिर आने वाले कई वर्षों तक मजबूत रहेगा। वर्तमान में मंदिर का शिखर कई जगह से जीर्ण शीर्ण दिखाई देने लगा है। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की की टीम की देखरेख में दिल्ली की कंपनी एएआईसी इसके लिए विशेष रूप से स्टीम वाश मशीन लेकर आएगी, जिससे मंदिर के पुरातत्व को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और शिखर चमक उठेगा। वर्तमान में जो रंग किया जा रहा है, उसे भी स्टीम वाश से साफ कर दिया जाएगा। इसके बाद नया रंग रोगन किया जाएगा।

आम तौर पर किसी पुराने स्ट्रक्चर का पेंट साफ करने के लिए सेंड ब्लास्टिंग किया जाता है, लेकिन महाकाल मंदिर प्राचीन है, इसलिए स्टीम वाश मशीन का उपयोग किया जाएगा ताकि मंदिर की प्राचीन दीवार और नक्काशी को नुकसान न पहुंचे। यह काम उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से कराया जा रहा है। जल्द ही साफ सफाई का काम शुरू होगा। मुख्य शिखर सहित परिसर के सभी मंदिरों का भी रिनोवेशन होगा। मंदिरों के शिखर और अंदर से भी ये काम किया जाएगा। इस काम के लिए प्राधिकरण ने 10.27 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने इसके लिए स्वीकृति दे दी है। मचान बनने के बाद एक हफ्ते में काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

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वाटर प्रूफिंग भी गुड़ और चूने के घोल से
मंदिर में रिनोवेशन का यह काम विशेष देसी और पुरानी पद्धति से किया जाएगा। इसके लिए गुड़, चूना, उड़द, मेथी दाना आदि का उपयोग होगा। शिखर के जो हिस्से पुराने या जीर्ण शीर्ण हो गए हैं, उनको इसी से ठीक किया जाएगा। यहां तक कि वाटर प्रूफिंग भी इसी घोल से की जाएगी। इस काम में सीमेंट या अन्य रसायन का उपयोग नहीं किया जाएगा।

शिवरात्रि से पहले मुख्य शिखर चमकेगा!
मंदिर का यह काम करने के लिए एक साल का टारगेट रखा गया है। यूडीए की कोशिश है कि आने वाली शिवरात्रि (मार्च 2027) तक मुख्य शिखर का काम पूरा कर दिया जाए। जल्द ही रुड़की और दिल्ली से इस काम के लिए टीम मंदिर परिसर में डेरा डालेगी।
केदारनाथ, तुंगनाथ के बाद महाकाल आएगी टीम

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान ने देश के कई प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों के निर्माण, संरचनात्मक सुरक्षा और जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

2013 की भीषण आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर की संरचनात्मक मजबूती की जांच करने और संरक्षण उपायों को सुझाने में भी सीबीआरई का योगदान रहा।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर की नींव का संरचनात्मक डिजाइन तैयार किया और भूकंपरोधी विश्लेषण किया।

समुद्र तल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर उत्तराखंड में स्थित तुंगनाथ मंदिर के झुकने (टिल्ट) की समस्या आने पर संरक्षण और मरम्मत की कमान संभाली।

महाकाल मंदिर के शिखर सहित परिसर के सभी मंदिरों का रिनोवेशन एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य है। सीबीआरई के निर्देशन में यह काम पूरी जिम्मेदारी से किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
-डॉ. रवि सोलंकी, अध्यक्ष यूडीए

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