भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में मांगे दस्तावेज

मुस्लिम पक्ष की पांच याचिकाओं पर सुनवाई
धार। भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। सभी पक्षों को संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ ने हाईकोर्ट का रिकॉर्ड भी सभी पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के 15 मई 2026 के फैसले के खिलाफ पांच याचिकाएं दायर की हैं। हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया था। मुस्लिम पक्ष इस फैसले पर रोक और वर्ष 2003 की पूजा-पाठ व नमाज व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहा है।
अभी नमाज के लिए तय है अलग जगह: सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मुस्लिम समाज को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की व्यवस्था देने का निर्देश दिया था। बाद में भोजशाला के पीछे दाईं ओर स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन पर नमाज तय की गई। तब से यहां जुमे की नमाज अदा की जा रही है।
चार सप्ताह में पेश होंगे दस्तावेज
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष और याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि संगठन सुप्रीम कोर्ट में चल रहे चार प्रकरणों में पक्ष रख रहा है। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापना और भोजशाला के गौरव की पुर्नस्थापना के लिए न्यायिक संघर्ष जारी रहेगा। अब सभी पक्षों को तय समयसीमा में दस्तावेज पेश करने होंगे।









