वोटर पुराने तो नया आवेदन क्यों : SC

राजधानी के 47 लाख मतदाताओं तक पहुंचने को कोई तरीका निकाले आयोग
47 लाख में से 43 लाख वोटर्स स्थायी रूप से शिफ्ट या अनुपस्थित बताए गए
शिफ्ट या अनुपस्थित रहने से गणना फॉर्म न पहुंचा, तो फॉर्म-8 भरने की अनुमति मिले : एससी
जिनका नाम 2026 की मतदाता सूची में था, उन्हें पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए निर्धारित फॉर्म-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल चुनाव आयोग से किया। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए पुराने वोटर्स पर कोर्ट ने अहम सवाल किए।
नईदिल्ली, एजेंसी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, 2026 की सूची आधार है और किसी व्यक्ति का नाम उसमें था, लेकिन पता बदलने या अनुपस्थित रहने के कारण गणना फॉर्म नहीं पहुंचा, तो उसे फॉर्म-8 भरने की अनुमति मिलनी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि करीब 47 लाख नाम हटाए गए है, जिनमें से 43 लाख लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित बताया गया है।
इनमें ऐसे लोग भी है, जिन्हें गणना फॉर्म नहीं मिला। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों के लिए अलग श्रेणी बनाई जाए, ताकि वे कारण बताकर दस्तावेज जमा कर सकें। कोर्ट ने बीएलओ से संपर्क करने की जानकारी देने का सुझाव भी दिया। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि अदालत की चिंताओं पर विचार कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
कोर्ट ने जल्दबाजी न करने की दी सलाह
चीफ जस्टिस ने आयोग को जल्दबाजी न करने की सलाह दी। कहा, दिल्ली में जल्द चुनाव नही है, इसलिए गणना फॉर्म जमा करने की समयसीमा बढ़ाने पर विचार करे। हटाए नामों की सूची सार्वजनिक कर उन्हें बताएं कि आयोग उनसे संपर्क नहीं कर पाया है।
मतदान अधिकार है। हल्के में नहीं छीना जा सकता। कोई मतदाता किसी वजह से गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाया, तो क्या उसका नाम हमेशा के लिए लिस्ट से बाहर हो जाएगा? – सुप्रीम कोर्ट









