लिफाफा नहीं खोलने पर भड़के शिक्षक संघ अध्यक्ष बोले –

आदिवासी के साथ अन्याय, शिकायत करूंगा
पांच घंटे तक मंथन करने के बाद विक्रमविवि कार्यपरिषद ने 11 महीने से बंद 12 लिफाफे खोले
पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला की दो गेस्ट फैकल्टी को यूजीसी वेतनमान देने का प्रस्ताव रोका
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की शुक्रवार को हुई कार्यपरिषद में जमकर हंगामा हुआ। अपना लिफाफा नहीं खोले जाने से नाराज शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ. कानिया मेड़ा ने मीटिंग हॉल के अंदर और बाहर दोनों जगह जमकर हंगामा किया। डॉ. मेड़ा ने कहा कि आदिवासी होने से उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। वह शिकायत राष्ट्रपति, राज्यपाल, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, प्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग से करेंगे। करीब 5 घंटे तक चले मंथन के बाद कार्यपरिषद ने पिछले नवंबर से बंद 18 में से 12 लिफाफे खोल दिए। शिकायत से जुड़े 6 लिफाफे के लिए परीक्षण समिति बनाई है। हालांकि सिलेक्शन कमेटी के चयन के बाद
किसी अन्य को परीक्षण का अधिकार नहीं है। ऐसे में यह मामला आगे उलझ सकता है।
दो बार स्थगित हो चुकी विक्रमविद्यालय की कार्यपरिषद् की मीटिंग में शुक्रवार को दो ही प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। पहला 18 असिस्टेंट प्रोफेसर का एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन और दूसरा पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययन शाला की दो गेस्ट फैकल्टी को यूजीसी वेतनमान देना। सबसे ज्यादा मंथन और चर्चा पहले प्रस्ताव पर हुई। 18 में से 6 असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रमोशन पर पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की आपत्ति थी। इसकी शिकायत राजभवन से की गई है। ऐसे में इन छह असिस्टेंट प्रोफेसर से वन टू वन बातचीत करने का फैसला किया। इन सभी को एक-एक कर बुलाया गया और इनसे चर्चा की गई। दोपहर 12 बजे शुरू हुई मीटिंग शाम 5 बजे तक चली।
इनसे हुई वन टू वन बात
डॉ. निश्चल यादव
डॉ. प्रतिष्ठा शर्मा
डॉ. पीएन तिवारी
डॉ. संग्रामभूषण सिंह
डॉ. कानिया मेड़ा
डॉ. कमल बुनकर
इन सभी ने अपना पक्ष मजबूती से रखा। डॉ. पीएन तिवारी ने बताया कि उनके खिलाफ की गई शिकायत जांच में गलत साबित हुई है। जस्टिस अग्रवाल कमेटी बिंदू नंबर 42 पर उन्हें क्लीनचिट दे चुकी है। डॉ. प्रतिष्ठाशर्मा ने उनसे जुड़ी शिकायत को गलत ठहराया और जरूरी दस्तावेज बताएं। ऐसा ही हाल डॉ. कानिया मेड़ा का भी रहा। पीजी में उनके ५० फीसदी से कम अंक की शिकायत थी। उन्होंने अपनी मार्कशीट देने की जानकारी दी।
सभी पक्षों को सुनने के बाद कार्यपरिषद ने तीन सदस्यीय परीक्षण समिति बनाने का फैसला किया। यह शिकायत का परीक्षण करेगी और राजभवन को जानकारी देगी।उच्चशिक्षा विभाग के एडिशनल डायरेक्टर और दो प्रोफेसर इसके सदस्य रहेंगे। प्रोफेसर के नाम तय करने के लिए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज को अधिकृत किया गया।
शिक्षक संघ अध्यक्ष का गुस्सा फूटा, खुलकर जताई नाराजगी
लिफाफा नहीं खुलने से शिक्षक संघ अध्यक्ष डॉ कानिया मेड़ा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पहले कार्यपरिषद सदस्यों के सामने और बाद में हॉल के बाहर जमकर हंगामा किया। मेड़ा ने कहा कि आदिवासी समाज से आने के कारण उनके साथ अन्याय हो रहा है। पूरे विश्वविद्यालय में वे एक मात्र आदिवासी हैं और उनके प्रमोशन को टाला जा रहा है। वह अपनी बात राष्ट्रपति, राज्यपाल और एसटी आयोग तक रखेंगे।
12 के लिफाफे खुले बने एसोसिएट प्रोफेसर
12 अविवादित असिस्टेंट प्रोफेसर के लिफाफे कार्यपरिषद ने खोल दिए। यह अब एसोसिएट प्रोफेसर हो गए हैं। सबसे ज्यादा प्रमोशन पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में हुए हैं।
इन्हें मिला प्रमोशन
डॉ. गणपत अहिरवार (फिजिक्स)
डॉ. मेघा पांडेय (पॉलिटिकल साइंस)
डॉ. नलिनसिंह पंवार (पॉलिटिकल साइंस)
डॉ. वीरेंद्र चांवरे (पॉलिटिकल साइंस)
डॉ. विश्वजीत परमार (पॉलिटिकल साइंस)
डॉ. दर्शन दुबे (फार्मेसी)
डॉ. सलिल सिंह(जूलाजी)
डॉ नयनतारा डामोर (एमबीए)
डॉ राज बोरिया (लाइब्रेरी साइंस)
डॉ. पीडी दास (माइक्रो बायोलाजी)
डॉ मनु गौराहा (समाजशास्त्र)
डॉ. राजू मूसलगांवकर (ज्योर्तिविज्ञान एवं संस्कृत)
दूसरे प्रस्ताव को टाला
कार्यपरिषद में दूसरा प्रस्ताव पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला के गेस्ट फैकल्टी डॉ. सुशील शर्मा और डॉ. अजय शर्मा को यूजीसी वेतनमान देने का था। दोनों को बुलाकर बात की गई। फिलहाल इस प्रस्ताव को रोक दिया गया।
राजभवन की सिलेक्शन कमेटी का परीक्षण क्या उचित ?
कार्यपरिषद ने रोके छह नामों वाले लिफाफे की जांच के लिए तीन सदस्यीय परीक्षण समिति बनाई है, लेकिन इसने कार्यपरिषद के इस फैसले को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। चूंकि प्रमोशन की एक तय प्रक्रिया है। इसमें स्क्रीनिंग कमेटी नाम फाइनल करती है और इन नामों को सिलेक्शन कमेटी फाइनल करती है। सिलेक्शन कमेटी का गठन कुलाधिपति (राज्यपाल) करते हैं। इसका फैसला अमूमन अंतिम (कोर्ट में मसला नहीं होने पर) होता है। चूंकि राजभवन की कमेटी कार्यपरिषद से ऊपर है,ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजभवन की सिलेक्शन कमेटी के फैसले का परीक्षण कार्यपरिषद से अनुमोदित समिति कर सकती है?
12 लिफाफे खोले हैं छह का परीक्षण होगा
प्रमोशन वाले 18 लिफाफों में से 12 खोल दिए गए हैं। छह का परीक्षण करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। एडिशनल डायरेक्टर और दो प्रोफेसर इसके सदस्य रहेंगे। कानिया मेड़ा जी का मसला बंद छह लिफाफों में है। बंद लिफाफे वाले असिस्टेंट प्रोफेसर से वन टू वन बात की है। उनसे अपना पक्ष समिति के सामने रखने का कहा है। समिति की रिपेार्ट आने के बाद इनके लिफाफों पर फैसला कर लिया जाएगा। दो गेस्ट फैकल्टी को यूजीसी वेतनमान देने का प्रस्ताव फिलहाल रोक लिया गया है।
राजेशसिंह कुशवाह
सीनियर कार्यपरिषद मेंबर
आदिवासी समाज के साथ अन्याय
मैं आदिवासी समाज से आता हूं। मेरा लिफाफा नहीं खोलकर आदिवासी समाज के साथ अन्याय किया गया है। इसकी शिकायत राष्ट्रपति, राज्यपाल, अनुसूचित जनजाति आयोग से की जाएगी।
डॉ. कानिया मेड़ा, अध्यक्ष विश्वविद्यालयीन शिक्षक संघ
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