लोको पायलट की सतर्कता से टला बड़ा रेल हादसा, अब मिला पुरस्कार

रतलाम मंडल के तीन कर्मचारियों को मिला मुुंबई में पुरस्कार
उज्जैन। उज्जैन के एक सहायक लोको पायलट ने अपनी सूझबूझ से एक बड़ा रेल हादसा टाल दिया। कुछ ऐसा ही कारनामा पिपलोद के ट्रैक मेंटेनर और पाइंट्समैन ने भी किया। तीनों को मुंबई में पुरस्कृत किया गया।
रतलाम डिवीजन से पुरस्कृत होने वाले रेलकर्मी उज्जैन के सहायक लोको पायलट योगेश बारस्कर, पिपलोद के ट्रैक मेंटेनर सुरेश भाई और खंडवा की अंजती कैबिन के पाइंटस मैन अमित कुमार हैं।
केस 1 : इंजन की हीट पहचानी, इंजन फेल
उज्जैन के सहायक लोक पायलट योगेश बारस्कर 25 सितंबर को ट्रेन लेकर गए थे। रतलाम रेलवे स्टेशन पर जब उन्होंने इंजन का एक्सल बॉक्स चैक किया तो यह बेहद गरम हो रहा था। बॉक्स नंबर 10 का तापमान 62 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा था। ट्रेन स्टार्ट होने पर यह और बढ़ जाता है। ऐसे में हादसा होने की आशंका बन जाती। उन्होंने तुरंत कंट्रोल को सूचना दी। इसके बाद इंजन को फेल घोषित कर हटाया गया। दूसरा इंजन लगाकर ट्रेन को रवाना किया गया।
केस 2 : ओएचई केबल टूटकर ट्रैक पर गिरी थी, सूचना दी: पिपलोद में पदस्थ ट्रैक मेंटेनर सुरेश कुमार ने भी कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया। वे 29 सितंबर 2026 को ट्रैक का मुआयना कर रह थे। चांचेलाव-कंसुधी के बीच ट्रैक पर ओएचई (रेल इंजन को करंट देने वाली लाइन) जमीन पर गिरी पड़ी थी। ऐसे में ट्रैक पर ट्रेन आने से हादसे का खतरा हो सकता था। उन्होंने तत्काल अफसरों को सूचना दी। इसके बाद ओएचई का मेंटेनेस शुरू हुआ।
केस 3 : वैगर के हॉट एक्सल से निकल रही थी चिंगारी: खंडवा बायपास स्थित अंवती कैबिन पर पदस्थ अमितकुमार ने भी हादसा रोका। पाइंटस मैन अमित कुमार ने 1 अगस्त को ट्रैक से गुजर रही एक मालगाड़ी की 12 नंबर के वैगन के हॉट एक्सल से चिंगारी उठती देखी तो तत्काल लाल सिग्नल देकर ट्रेन रुकवाई। कमी को दूर कर ट्रेन को रवाना किया। इस तरह हादसा टल गया।
पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया कि पश्चिम रेलवे के मुंंबई मुख्यालय में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। उसमें रतलाम मंडल के तीन कर्मचारियों को मैन ऑफ द मंथ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान असाधारण सतर्कता, कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण के लिए दिया जाता है।









