उज्जैन के भाजपा नेता बोले- उज्जैन संभाग के सबसे ज्यादा जिले तो मुख्यालय उज्जैन ही हो

उज्जैन-इंदौर के बीच यूआईएमएल नामकरण और मुख्यालय विवाद

सोशल मीडिया पर दोनों शहर के लोगों ने खोल रखा है मोर्चा
सबसे ज्यादा हाईवे, जिलों से बेहतर कनेक्टिविटी, उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता उज्जैन में तो इंदौर में क्यों मुख्यालय बनाए
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) में उज्जैन का नाम आगे रखने और मुख्यालय उज्जैन में रखने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया गया है। यूआईएमआर के दायरे में उज्जैन संभाग के चार जिले आ रहे हैं और इन जिलों से रोड और रेल कनेक्टिविटी इंदौर संभाग की तुलना में ज्यादा है। यूआईएमआर में आ रहे उज्जैन संभाग के चार जिलो में से तीन एग्रीकल्चर में बड़ा काम कर रहे हैं और यहां एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट की संभावनाएं भी ज्यादा है। इन सब स्थितियों को देखते हुए ही यूआईएमआर का मुख्यालय उज्जैन में रखने का फैसला किया गया है।
दरअसल, यूआईएमआर नाम और इसका मुख्यालय उज्जैन में रखने पर इंदौर के लोग सोशल मीडिया पर स्यापा कर रहे हैं। वह ऐसा प्रदर्शित कर रहे हैं, जैसे इंदौर से कोई बड़ी सौगात छीन ली गई है, हकीकत में उज्जैन का चयन उज्जैन की मजबूत स्थिति के कारण किया गया है।
क्यों हुआ चयन
सबसे ज्यादा जिले- यूआईएमआर में छह जिले हैं। उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, इंदौर और धार। इनमें से उज्जैन, देवास, शाजापुर रतलाम उज्जैन संभाग में आते हैं और इनकी २५ तहसीलें प्रोजेक्ट में शामिल हैं। यूआईएमआर में इंदौर संभाग के दो ही जिले इंदौर और धार हैं और इनकी भी सिर्फ 13 ही तहसीलें हैं।
रोड कनेक्टिविटी- यूआईएमआर में शामिल जिलों की दूरी (धार-देवास को छोड़कर) इंदौर की तुलना में उज्जैन से कम है। शाजापुर से उज्जैन, 65, रतलाम 100, देवास 30, इंदौर 55 और धार 117 किलोमीटर है। जबकि इंदौर से शाजापुर 100, रतलाम 141, धार 65, देवास 25 किलोमीटर है।
हाइवे-नेशनल हाइवे- उज्जैन संभाग के चार जिलों से सबसे ज्यादा हाईवे गुजरते हैं। यहां नई दिल्ली-मुंबई, नीमच लेबड (रतलाम), उज्जैन-जावरा, देवास-बदनावर, उज्जैन-गरोठ, उज्जैन-झालावाड़, उज्जैन-इंदौर(उज्जैन), आगरा-मुंबई (शाजापुर), देवास-भोपाल, इंदौर-नागपुर, इंदौर- बैतूल (देवास) से गुजरते हैं। इंदौर से आगरा-मुंबई, इंदौर-खंडवा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर ही है।
रेल कनेक्टिविटी- यूआईएमआर में शामिल उज्जैन संभाग के चार जिलों बेहतर रेल कनेक्टिविटी भी रखते हैं। इनमें से मुंबई-दिल्ली रेलवे ट्रैक रतलाम-इंदौर (रतलाम), उज्जैन-भोपाल रेलवे ट्रैक, उज्जैन-इंदौर ट्रैक,(उज्जैन) और मक्सी-ग्वालियर ट्रैक (शाजापुर ) में हैं। इंदौर के पास एक ही रेलवे ट्रैक इंदौर-मक्सी है और इसका भी बड़ा हिस्सा उज्जैन संभाग के देवास से गुजरता है।
खाली इंडस्ट्रीयल एरिया मेट्रोपॉलिटन का मतलब ही संबंधित एरिये के समग्र विकास है। इसमे आवासीय, इंडस्ट्रीयल, कमॢशयल इंफ्रा डेवलप करना शामिल रहेगा। आवासीय के लिए इंदौर में अब जगह कम बची है। इंदौर के राऊ, मांगल्या जैसे इंडस्ट्रीयल एरिया पैक हो चुके हैं। धार के पीथमपुर में भी अब जगह नहीं है। उज्जैन में विक्रम उद्योगपुरी का दूसरा फेज तैयार हो चुका है। शाजापुर में शाजापुर, मक्सी के बाद पोलायकलां में नया इंडस्ट्रीयल एरिया बनाया जा रहा है। रतलाम में भी काफी जगह मौजूद है।
उज्जैन किसी से कम नहीं
महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में रोजाना २.५ लाख पर्यटक आ रहे हैं। पर्व विशेष पर तो यह संख्या १० लाख तक पहुंच जाती है। ऐसे में उज्जैन में ही मेट्रोपॉलिटन मुख्यालय रहना चाहिए। इस मुद्दे पर हम सब सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ हैं। हम दोनों उज्जैन को आगे रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
अनिल फिरोजिया, सांसद
यूआईएमआर में उज्जैन संभाग के सबसे ज्यादा जिले हैं। इनके डेवलपमेंट के हिसाब से ही मुख्यालय उज्जैन रखा गया है। इन सबकी इंदौर की तुलना में उज्जैन से ज्यादा बेहतरीन कनेक्टिविटी है।नाम की दृष्टि से विरोध करना ठीक नहीं है। इस मामले में सोच बड़ी रखने की जरूरत है।
जगदीश अग्रवाल, पूर्व यूडीए अध्यक्ष
उज्जैन में हर साल करोड़ों पर्यटक आते हैं। यह बाबा महाकाल की नगरी है। ऐसे में नाम और मुख्यालय उज्जैन में ही होना चाहिए। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सेठी जी उज्जैन के रहने वाले थे लेकिन उन्होंने इंदौर को डेवलप किया। आज उज्जैन को अगर उसका हक मिल रहा है तो इंदौर को क्यों दर्द हो रहा है। उज्जैन को उसका हक मिलना ही चाहिए।
प्रकाश चित्तौड़ा, पूर्व नगरनिगम अध्यक्ष
मैं अभी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकूंगा।
अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक उज्जैन उत्तर
उज्जैन राजा विक्रमादित्य, मौर्य वंश और सिंधिया घराने की राजधानी रह चुकी है। इंदौर तो स्थापित हो चुका है। उज्जैन को अभी और स्थापित होने की जरूरत है। अभी भी प्रदेश के दूसरे शहरों में अन्य विभागों के मुख्यालय (ग्वालियर मे राजस्व मंडल, परिवहन विभाग, एजी ऑफिस, जबलपुर में हाई कोर्ट की मेन बैच) है, ऐसे में उज्जैन में मेट्रोपॉलिटन मुख्यालय रहने पर आपत्ति नहीं होना चाहिए।
सोनू गेहलोत, पूर्व नगरनिगम अध्यक्ष
इंदौर वालों की सोच छोटी है। खासकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की। वह उज्जैन को विकसित होता नहीं देख पा रहे हैं, इसलिए राजनीति करवा रहे हैं। इंदौर मध्यप्रदेश का दिल है तो उज्जैन उसकी धड़कन है। कांग्र्रेस को भ्रम फैलाने से बचना चाहिए।
संजय अग्रवाल, भाजपा नगर अध्यक्ष
उज्जैन की इज ऑफ लिविंग में बेस्ट
1- केंद्र सरकार के इज ऑफ लिविंग इंडेक्स में उज्जैन 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों में रहने के लिए सबसे उपयुक्त शहर है।
2- उज्जैन का विक्रम इंडस्ट्रीयल एरिया सुविधाओं के हिसाब से टॉप पर है। यह बड़े भूखंड हैं, अच्छी सड़कें हैं। 24 घंटे की बिजली सप्लाई है। नर्मदा जल है।









