आम श्रद्धालुओं के लिए मशक्कत की भस्मार्ती, फॉर्म के लिए 9 घंटे इंतजार

पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर होता है फार्म वितरण, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को घंटों लगना पड़ता है लाइन में

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। यदि आप भगवान महाकाल की भस्मार्ती में आम श्रद्धालुओं की तरह शामिल होना चाहते हैं तो यह खबर बेहद जरूरी है। आम श्रद्धालुओं के लिए इतने नियम-कायदे हैं कि उसे पूरा करने में घंटों का समय लग रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को हो रही है।
नि:शुल्क भस्मार्ती के नाम पर फॉर्म लेने के लिए उन्हें करीब 9 घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है और परमिशन जारी होने तक यह समय और बढ़ रहा है। नियमों की जटिलता से वह बेहद नाखुश हैं। दरअसल, १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में ही प्रतिदिन तडक़े 4 बजे भस्मार्ती होती है। इस दिव्य आरती के साक्षी बनने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु रोज मंदिर पहुंचते हैं। आम श्रद्धालुओं की तरह उन्हें भस्मार्ती में शामिल होना हो तो उन्हें काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
कैसे परेशान होते हैं आम श्रद्धालु, ऐसे समझें
दरअसल, मंदिर समिति द्वारा भस्मार्ती में शामिल होने के लिए प्रतिदिन 1800 परमिशन जारी करती है। ऑनलाइन के लिए 400 और प्रोटोकॉल के लिए ११५० श्रद्धालुओं को सशुल्क अनुमति जारी की जाती है। नि:शुल्क भस्मारर्ती दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं को 50 फार्म वितरित किए जाते हैं। हर फॉर्म पर 5 लोगों को परमिशन है। इस तरह 50 फार्म पर 250 लोगों को अनुमति जारी होती है। यहीं से आम श्रद्धालुओं के लिए परेशानी शुरू होती है। उन्हें रात 11 बजे त्रिवेणी संग्रहालय के समीप महाकाल लोक से फॉर्म वितरित किए जाते हैं।
पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर फॉर्म मिलने से बाहर से आने वाले श्रद्धालु दोपहर २ बजे से गेट के बाहर लाइन में खड़े हो जाते हैं। शाम 7 बजे क्रिस्टल कंपनी के सुरक्षाकर्मी पहले 50 श्रद्धालुओं की एंट्री करवाते हैं और नियमों का हवाला देते हुए शेष को कल आने का कहते हैं। 50 श्रद्धालुओं को महाकाल लोक के अंदर रात 11 बजे तक बैठाया जाता है।
इसके बाद फार्म वितरण शुरू होता है जिसमें एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। रात करीब 12.30 बजे श्रद्धालु फॉर्म लेकर फ्री होते हैं। दूसरे दिन फॉर्म जमा करने लिए श्रद्धालु सुबह गेट नंबर 1 अवंतिका द्वार के समीप स्थित भस्मारती कार्यालय पहुंचते हैं जहां से परमिशन मिलती है। वह अगले दिन तडक़े भस्मारती में शामिल हो पाते हैं, ऐसे में उन्हें करीब 36 घंटे खराब करना पड़ते हैं।
लाइन में खड़ा करवाना गलत
हम आईडी चैक कर फॉर्म दे देते हैं। लाइन में लगने की व्यवस्था सुरक्षा कंपनी की हो सकती है, इसमें मंदिर प्रशासन का रोल नहीं। श्रद्धालुओं को लाइन में खड़ा करवाना गलत है, मैं सुपरवाइजर से बात करता हूं।
मूलचंद जूनवाल सहायक प्रशासक, महाकाल मंदिर
नियमों की जटिलता से नाखुश श्रद्धालु
मैं दोपहर 2 बजे से यहां बैठा हूं। पहला नंबर भी मेरा ही है। पूछने पर पता चला रात ११ बजे फॉर्म दिए जाएंगे। दर्शन के लिए इतने नियम शायद ही किसी मंदिर में हों। क्या भगवान सिर्फ पैसा खर्च करने वालों के हैं, नियमों को आसान बनाना चाहिए।
शांति शाह, बीरभूम (पश्चिम बंगाल)
मैं दोपहर 3 बजे लाइन में लगा था तब जाकर रात 12 बजे फॉर्म मिला। भस्मारती कार्यालय से फॉर्म जमा करवाने के बाद परमिशन मिलने में ज्यादा समय नहीं लगा लेकिन रात खराब हो गई। राहत की बात यह है कि अब भस्मार्ती में शामिल हो सकूंगा।
अर्जुन कुमार, कुशीनगर (यूपी)
आम श्रद्धालु भी आराम से दर्शन कर सकें, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। 50 फॉर्म ही वितरित करना है तो एक ही जगह पर वितरित कर हाथोंहाथ परमिशन भी दे देना चाहिए। लंबे समय से रात और अगला दिन खराब होता है।
सोनम जायसवाल, कुशीनगर (यूपी)









