Advertisement

बच्चों को सुबह जगाते समय अपनाएं ये 8 आदतें, बढ़ेगा आत्मविश्वास

सुबह का समय हर घर में हलचल और जल्दबाजी से भरा होता है, खासकर उन घरों में जहां स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बच्चे के दिन की शुरुआत जैसी होती है, उसका सीधा असर पूरे दिन उनके मूड, मानसिक व्यवहार, एकाग्रता और पढ़ाई पर दिखाई देता है? अक्सर माता-पिता समय की कमी के कारण बच्चों को स्कूल के लिए जल्दबाजी में, चिल्लाकर या डांटकर उठाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे सुबह से ही चिड़चिड़े हो जाते हैं और उनका पूरा दिन तनाव के साथ शुरू होता है।

 

Advertisement

बाल मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के शुरुआती कुछ मिनट बच्चों के मानसिक विकास और उनके आत्मविश्वास के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं। अगर माता-पिता अपनी दिनचर्या में कुछ बहुत ही छोटे और आसान बदलाव कर लें, तो वे अपने बच्चों के दिन को खुशहाल, ऊर्जावान और सकारात्मक बना सकते हैं। आइए जानते हैं उन 8 बेहतरीन आदतों के बारे में, जो आपके बच्चे की सुबह को पूरी तरह बदल सकती हैं।

1. प्यार से जगाएं, डांटकर या झकझोर कर नहीं:

अक्सर देखा जाता है कि जब बच्चे गहरी नींद में होते हैं, तो उन्हें अचानक तेज आवाज में आवाज देकर या बिस्तर से खींचकर उठा दिया जाता है। ऐसा करने से बच्चों का नर्वस सिस्टम अचानक चौकन्ना हो जाता है, जिससे उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। बच्चों को हमेशा धीरे-धीरे प्यार से पुकारें, उनके सिर या पीठ पर हल्का हाथ फेरें। यदि संभव हो तो सुबह के समय कमरे में कोई धीमा और मधुर संगीत या भजन चला दें। इस सौम्य तरीके से जागने पर बच्चे खुद को सुरक्षित और मानसिक रूप से सकारात्मक महसूस करते हैं।

Advertisement

2. सुबह की शुरुआत एक प्यारी मुस्कान के साथ करें:

जैसे ही बच्चा अपनी आंखें खोले, सबसे पहले उसे अपने माता-पिता का मुस्कुराता हुआ चेहरा दिखना चाहिए। बच्चे को एक प्यारी सी मुस्कान दें और गर्मजोशी से “गुड मॉर्निंग” कहें। माता-पिता के चेहरे के भाव बच्चों के अवचेतन मन (Subconscious mind) पर बहुत गहरा और सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इससे उनका आंतरिक आत्मविश्वास बढ़ता है और वे एक बेहतरीन मूड के साथ अपने नए दिन का स्वागत करते हैं।

3. जादुई झप्पी (गले लगाना) है बेहद जरूरी:

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठते ही बच्चों को कुछ मिनटों के लिए गले लगाना (Hug करना) उनके शरीर में ‘ऑक्सीटोसिन’ नामक हैप्पी हार्मोन को रिलीज करता है। यह छोटी सी आदत उन्हें भावनात्मक सुरक्षा का एक मजबूत एहसास कराती है। रात भर की नींद के बाद जब बच्चा माता-पिता के गले लगता है, तो उसका मानसिक तनाव और घबराहट पूरी तरह कम हो जाती है, जिससे उसके भीतर सकारात्मक भावनाओं का संचार होता है।

Advertisement

4. सुबह-सुबह केवल सकारात्मक बातें करें:

सुबह उठते ही बच्चों के सामने पुरानी गलतियों, अधूरी पढ़ाई या किसी शिकायत का जिक्र बिल्कुल न करें। इसके बजाय उनसे उनके स्कूल, दोस्तों या उनकी किसी पसंदीदा खेल गतिविधि के बारे में अच्छी और उत्साहवर्धक बातें करें। उन्हें ऐसे वाक्य कहें जैसे— “आज तुम्हारा दिन बहुत शानदार जाएगा”, “तुम आज क्लास में बहुत अच्छा काम करोगे” या “मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।” ये शब्द बच्चों के मन में एक नई ऊर्जा और उत्साह का बीज बोते हैं।

5. सुबह की ‘जल्दी करो’ वाली जल्दबाजी को कम करें:

अगर किसी बच्चे को सुबह उठने से लेकर घर से निकलने तक बार-बार माता-पिता से “जल्दी करो”, “लेट हो रहे हो”, “तुम हमेशा देर करते हो” जैसी बातें सुननी पड़ें, तो वह अत्यधिक मानसिक तनाव (Anxiety) महसूस करने लगता है। इस अफरा-तफरी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि रात में ही स्कूल बैग तैयार कर लिया जाए, यूनिफॉर्म पर प्रेस कर ली जाए और जूते-मोजे जैसी जरूरी चीजें एक जगह रख दी जाएं। जब सुबह चीजें व्यवस्थित होंगी, तो घर का माहौल शांत और खुशहाल रहेगा।

6. एक पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता जरूर कराएं:

खाली पेट स्कूल जाने वाले बच्चों की शारीरिक ऊर्जा और क्लास में ध्यान लगाने की क्षमता (एकाग्रता) दोनों ही बहुत बुरी तरह प्रभावित होती हैं। इसलिए चाहे बच्चा कितना भी आनाकानी करे, उसे सुबह का पौष्टिक नाश्ता जरूर कराएं। उनके ब्रेकफास्ट में दूध, ताजे फल, उबला अंडा, पोहा, सूजी का उपमा, ओट्स या हल्के पराठे जैसी पौष्टिक चीजें शामिल करें। एक संतुलित और भारी नाश्ता बच्चे के मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है और उसे पूरे दिन स्कूल में एक्टिव बनाए रखता है।

7. थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि की आदत डालें:

सुबह उठने के बाद बच्चे को कम से कम 5 से 10 मिनट के लिए हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग, योग या फिर घर की बालकनी या गार्डन की खुली हवा में टहलने के लिए प्रेरित करें। सुबह की ताजी ऑक्सीजन और हल्की शारीरिक कसरत से शरीर में रक्त का संचार (Blood circulation) बेहतर होता है। इससे रात का आलस्य और भारीपन तुरंत दूर हो जाता है और बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह फ्रेश हो जाता है।

8. सुबह के समय स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) से सख्त दूरी बनाएं:

आजकल कई बच्चों की आदत होती है कि वे आंख खोलते ही सबसे पहले मोबाइल ढूंढते हैं या टीवी चालू कर देते हैं। सुबह का समय दिमाग को शांत, केंद्रित और फोकस्ड रखने के लिए सबसे सर्वोत्तम माना जाता है। जागते ही स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू-लाइट और रील्स या कार्टून का तेज विजुअल बच्चे के दिमाग को अति-उत्तेजित (Over-stimulate) कर देता है, जिससे उनकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। सुबह स्क्रीन की बजाय बच्चों को प्रकृति से जुड़ने दें और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने के लिए प्रेरित करें।

निष्कर्ष: बच्चों की परवरिश में आपकी दी गई सुख-सुविधाओं से कहीं ज्यादा मायने रखता है आपका दिया हुआ समय और व्यवहार। सुबह के ये छोटे-छोटे पेरेंटिंग टिप्स न केवल आपके बच्चे के दिन को खुशहाल बनाएंगे, बल्कि उनके समग्र मानसिक और भावनात्मक विकास में भी एक मील का पत्थर साबित होंगे।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें