अमरनाथ यात्रा शुरू, पीएम मोदी ने यात्रियों से की पांच अपीलें

पवित्र अमरनाथ यात्रा की शुरुआत शुक्रवार से हो गई। यात्रा के पहले दिन गांदरबल जिले के बालटाल और अनंतनाग जिले के नुनवान-पहलगाम बेस कैंप से कुल 4,822 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर व्यापक इंतजाम किए हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के नाम एक संदेश जारी कर स्वच्छता, सुरक्षा, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रहित से जुड़े पांच संकल्प अपनाने की अपील की है।

पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने शुरू की यात्रा
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार पहले जत्थे में शामिल सभी श्रद्धालु गुरुवार को दोनों बेस कैंपों में पहुंच चुके थे। अधिकारियों का अनुमान है कि पहले दिन श्रद्धालुओं के साथ सुरक्षा बलों, स्वास्थ्यकर्मियों और सेवा कार्यों में लगे कर्मचारियों सहित लगभग नौ हजार लोग पवित्र गुफा तक पहुंचेंगे।
यात्रा दो मार्गों से कराई जा रही है। पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग लगभग अड़तालीस किलोमीटर लंबा है, जबकि बालटाल मार्ग करीब चौदह किलोमीटर का है। यात्रा अट्ठाईस अगस्त तक चलेगी।
प्रधानमंत्री ने पांच संकल्प लेने का किया आग्रह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धालुओं के नाम लिखे संदेश में कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने यात्रियों से पांच संकल्प अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सभी निर्देशों का पालन करें, यात्रा के खर्च का कम से कम दस प्रतिशत स्थानीय उत्पाद खरीदने में लगाएं, रक्षाबंधन पर “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधा भेंट करें तथा पूरे वर्ष राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस, चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों, सफाई कर्मियों और सेवा में जुटे सभी स्वयंसेवकों का भी आभार व्यक्त किया।
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पहला संकल्प (स्वच्छता): सभी श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान सफाई के नियमों का सख्ती से पालन करें। पवित्र गुफा और पूरे यात्रा मार्ग को साफ-सुथरा रखने में अपना सक्रिय योगदान दें, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
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दूसरा संकल्प (सुरक्षा नियम): प्रशासन द्वारा जारी सभी आदेशों, यातायात नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। पहाड़ों पर होने वाली अचानक बारिश, फिसलन और अत्यधिक ठंड को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहें।
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तीसरा संकल्प (वोकल फॉर लोकल): अपनी यात्रा के कुल बजट का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों और कलाकृतियों को खरीदने में खर्च करें। इससे वहां के स्थानीय परिवारों और युवाओं के रोजगार को संबल मिलेगा।
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चौथा संकल्प (प्रकृति संरक्षण): यात्रा के अंतिम दिन यानी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने भाई या बहन को एक पौधा उपहार में दें। इस तरह प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को देशव्यापी आंदोलन बनाएं।
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पांचवां संकल्प (राष्ट्र प्रथम): देश के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। राष्ट्र प्रथम की इसी भावना के साथ साल भर काम करते हुए वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।
विकसित भारत का संकल्प: बाबा बर्फानी देंगे नई ऊर्जा
पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि यह यात्रा सनातन आस्था और सांस्कृतिक एकता का एक भव्य महोत्सव बनेगी। उन्होंने प्रार्थना की कि बाबा बर्फानी सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनाएं, ताकि हम सब मिलकर विकसित भारत के संकल्प को समय से सिद्ध कर सकें।
पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेज
इस वर्ष अब तक तीन लाख नब्बे हजार से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। जिन लोगों ने पहले से पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
यात्रियों को मेडिकल प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पहचान पत्र, आरएफआईडी कार्ड, पासपोर्ट आकार के फोटो तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने यात्रा से पहले नियमित पैदल अभ्यास, प्राणायाम और शारीरिक तैयारी करने की भी सलाह दी है।
अमरनाथ यात्रा का ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों के अनुसार अमरनाथ यात्रा का उल्लेख बारहवीं शताब्दी में लिखी गई राजतरंगिणी में “अमरेश्वर” के रूप में मिलता है। बाद में मुगल काल के इतिहासकार अबुल फजल ने भी अपनी पुस्तक में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग का वर्णन किया था। उन्नीसवीं शताब्दी में डोगरा शासन और बाद में ब्रिटिश काल में यात्रा को अधिक व्यवस्थित स्वरूप मिला। वर्ष दो हजार में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के गठन के बाद यात्रा प्रबंधन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाया गया।









