बडऩगर के किसान ने बेमौसम उगाया खीरा

45 टन उत्पादन लेकर कमाए 15 लाख रुपए

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। कौन कहता है कि खेती लाभ का धंधा नहीं हो सकती। बडऩगर के रूनिजा के प्रगतिशील किसान तेजराम नागर ने खेती को लाभ का धंधा बनाकर दिखा दिया है। उन्होंने बेमौसम ही खीरा उगाया और एक एकड़ में 45 टन उत्पादन लेकर 15 लाख रुपए कमाए है। उनके काम को देखने के लिए जिला पंचायत सीईओ श्रेयस कुमट भी पहुंचे। रूनिजा के तेजराम नागर खेती में नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने अपने खेत में दो पॉलीहाउस बना रखे हैं। नियंत्रित तापमान के बीच वह अच्छा उत्पादन ले रहे हैं।
क्या है पॉलीहाउस
पॉलीहाउस गैल्वेनाइज्ड पाइप और मोटी यूवी पॉलीथिन से तैयार ढांचा होता है। इसके भीतर तापमान, आद्र्रता और कीट-बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। ड्रिप इरिगेशन से इसमें सिंचाई की जाती है। इसकी मदद से हर समय हर उपज ली जा सकती हैं। चूंकि सब्जियां और फूल की खेती बहुत हद तक मौसम पर निर्भर रहती है, ऐसे में पॉलीहाउस इनकी खेती के लिए बहुत ही कारागर रहते हैं।
जिला पंचायत सीईओ पहुंचे पॉलीहाउस देखने
कृषि क्षेत्र में उच्च हाईटेक और नवाचार करने वाले नागर के पॉलीहाउस की जानकारी जब जिला पंचायत सीईओ श्रेयान्स कुमट को मिली तो वह भी बडऩगर एसडीएम. धीरेन्द्र पाराशर के साथ दौरा करने पहुंचे। नागर ने उन्हें बताया कि दो एकड़ में उन्होंने पॉलीहाउस बनाया है। इसमें फिलहाल खीरा लगाया हुआ है। हााई-टेक पाली हाउस में अब तक वह एक एकड़ में ४५ टन खीरे का उत्पादन ले चुके हैं। पॉलीहाउस में तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ हद तक कीट बीमारियों से भी छुटकारा रहता है। इसमें किसान साल भर बेमौसम सब्जियां, फूल और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगा सकते हैं।
पॉलीहाउस तकनीक से प्रति एकड़ 15 लाख का शुद्ध लाभ
किसान तेजराम नागर ने अधिकारियों को बताया कि पॉलीहाउस में खीरा-ककड़ी की फसल से वह प्रति एकड़ 15 लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा कमा चुके हैं।
4 हजार वर्गमीटर के दो पॉलीहाउस
तेजराम नागर ने बताया कि दो एकड़ जमीन पर उन्होंने 4 हजार वर्गमीटर के दो पॉलीहाउस बना रखे हैं। अभी इसमें केवल खीरा लगा रखा है। एक एकड़ में वह 45 टन तक उत्पादन ले चुके हैं।
महंगी होती है खेती
नागर के मुताबिक पॉलीहाउस पद्धति यूं तो अच्छी है लेकिन इसमें लागत थोड़ी ज्यादा आती है। खीरा का एक बीज ही ९ रुपए का आता है। १ लाख रुपए के बीज एक एकड़ में लग जाते हैं। हालांकि एक बीघा में ४५ टन तक उत्पादन होने से लाभ भी हो जाता है।









