दिवाली की रात इन 11 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक

दिवाली का त्योहार दीपों की रोशनी और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन हर कोई अपने घर को दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाता है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में साफ-सफाई, रोशनी और सकारात्मक माहौल होता है, वहां उनका स्वागत किया जाता है। यही वजह है कि लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा भी है।
हिंदू धर्म में दिवाली की रात दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। अगर आप भी इस दिवाली मां लक्ष्मी का स्वागत खास तरीके से करना चाहते हैं, तो घर की इन 11 जगहों पर दीपक जरूर जला सकते हैं।
दिवाली की रात इन 11 जगहों पर जलाएं दीपक
1. घर की दहलीज पर जलाएं पहला दीपक
दिवाली की रात पहला दीपक घर की दहलीज पर जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में सकारात्मकता का प्रवेश होता है। इसे भूमि देव के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक भी माना जाता है।
2. कुल देवी-देवताओं के नाम का दीपक
हर परिवार में कुल देवी या कुल देवता की पूजा करने की परंपरा होती है। दिवाली के दिन उनके नाम से भी एक दीपक जलाएं। इस दौरान परिवार की सुख-शांति और तरक्की की कामना करें।
3. मां लक्ष्मी की पूजा के स्थान पर जलाएं दीपक
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा के समय उनके सामने घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और पूजा के दौरान उसका ध्यान रखें।
4. मुख्य दरवाजे के दोनों ओर रखें दीपक
मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य दरवाजे को सजाया जाता है। दिवाली की रात दरवाजे के दाएं और बाएं तरफ दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में शुभता आती है और मां लक्ष्मी का स्वागत होता है।
5. नजदीकी मंदिर में जलाएं दीपक
दिवाली के दिन अपने घर के पास स्थित मंदिर में भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी देवी-देवता के मंदिर में दीपदान कर सकते हैं। इसे ईश्वर के प्रति आस्था और भक्ति प्रकट करने का तरीका माना जाता है।
6. घर के बाहर भी करें दीपदान
घर के बाहर या प्रवेश द्वार के आसपास दीपक जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि रोशनी से घर का वातावरण शुभ और मंगलमय बनता है। ध्यान रखें कि दीपक सड़क या आने-जाने वाले रास्ते में न रखें।
7. पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बहुत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसमें देवी-देवताओं का वास होता है। दिवाली के अवसर पर पीपल के नीचे दीपक जलाकर पितरों की कृपा और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है।
8. पानी रखने वाली जगह पर जलाएं दीपक
घर में जिस स्थान पर पीने का पानी रखा जाता है, वहां भी दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है। पहले के समय में मटके और कलश के पास दीपक रखने का चलन था। जल को जीवन का आधार माना गया है, इसलिए इस स्थान पर दीप जलाना शुभता का प्रतीक माना जाता है।
9. तुलसी के पौधे के पास जलाएं घी का दीपक
तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। दिवाली की शाम तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी के पास दीपक जलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
10. घर के आंगन या खुले स्थान में रखें दीपक
अगर आपके घर में आंगन, बरामदा या खुली जगह है, तो वहां भी दीपक जलाएं। इससे घर का हर कोना रोशन नजर आता है। परंपरा के अनुसार, दिवाली की रात घर के आंगन में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
11. शयनकक्ष में भी करें दीपदान
दिवाली की रात घर के शयनकक्ष में भी सुरक्षित स्थान पर एक दीपक जलाया जा सकता है। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। हालांकि, सोने से पहले दीपक को बुझा देना चाहिए और उसे पर्दे, बिस्तर या ज्वलनशील सामान के पास बिल्कुल न रखें।
यह भी पढ़े: आज का राशिफल (7 नवंबर 2026)
यह भी पढ़े: दिवाली पूजा में रखें इन बातों का ध्यान, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
दिवाली पर दीपक जलाने का क्या है धार्मिक महत्व?
दिवाली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन दीपक जलाने का अर्थ केवल घर को रोशन करना नहीं, बल्कि जीवन से नकारात्मकता दूर करके नई शुरुआत का संदेश देना भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान करने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
इस दिवाली आप भी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ घर के इन 11 स्थानों पर दीपक जलाकर दीपोत्सव मना सकते हैं। ध्यान रखें कि दीपक जलाने की परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं। सबसे जरूरी है कि त्योहार श्रद्धा, खुशी और सुरक्षा के साथ मनाया जाए।









