दिवाली पर जानवरों की पूजा करने वाला कौन-सा है यह देश?

दिवाली का त्योहार आते ही घरों में दीये जलाने और मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भारत में जहां दिवाली पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वहीं पड़ोसी देश नेपाल में इस पर्व को मनाने का तरीका कुछ अलग है। यहां दिवाली के दौरान कौओं को खाना खिलाया जाता है, कुत्तों को फूलों की माला पहनाकर तिलक लगाया जाता है और गायों की पूजा की जाती है। यम पंचक के दौरान होने वाली ये परंपराएं लोगों का ध्यान खींचती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व को नेपाल में तिहार भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर इन पशु-पक्षियों की पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यताएं हैं।
क्या है यम पंचक और तिहार?
नेपाल में दिवाली के आसपास मनाए जाने वाले पांच दिवसीय पर्व को तिहार या यम पंचक कहा जाता है। यह त्योहार मृत्यु के देवता यमराज, उनकी बहन यमुना और प्रकृति से जुड़े जीव-जंतुओं के सम्मान से जुड़ा है। इन पांच दिनों में अलग-अलग दिन कौए, कुत्ते, गाय और बैल की पूजा की जाती है। इसके अलावा माता लक्ष्मी की आराधना और भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित भाई टीका भी इस पर्व का अहम हिस्सा है। भारत में मनाई जाने वाली दिवाली से इसकी कई परंपराएं मिलती-जुलती हैं, लेकिन नेपाल में पशु-पक्षियों को सम्मान देने की परंपरा इसे खास बनाती है।
कौए को क्यों खिलाया जाता है खाना?
यम पंचक की शुरुआत काग तिहार से होती है। इस दिन कौओं को भोजन कराया जाता है। नेपाली धार्मिक मान्यताओं में कौए को यमराज का संदेशवाहक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि कौए के माध्यम से यमराज तक संदेश पहुंचता है। इस दिन लोग सुबह अपने घरों की छतों, आंगन या खुले स्थानों पर कौओं के लिए चावल, मिठाई और दूसरे पकवान रखते हैं। मान्यता है कि कौओं को भोजन कराने से घर-परिवार पर आने वाली परेशानियां और अशुभ घटनाएं दूर रहती हैं। इस परंपरा के जरिए पक्षियों के प्रति सम्मान भी जताया जाता है।
कुत्तों को माला पहनाकर क्यों होती है पूजा?
यम पंचक के दूसरे दिन कुकुर तिहार मनाया जाता है। इस दिन कुत्तों को तिलक लगाया जाता है और फूलों की माला पहनाई जाती है। उन्हें पसंद का भोजन भी दिया जाता है। खास बात यह है कि इस दिन केवल पालतू कुत्तों की ही नहीं, बल्कि सड़कों पर रहने वाले कुत्तों की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुत्ते को यमराज के द्वार का रक्षक और उनका संदेशवाहक माना जाता है। इसके अलावा कुत्ते की वफादारी, समझदारी और सुरक्षा करने की क्षमता के लिए भी उसे सम्मान दिया जाता है। कुकुर तिहार के जरिए इंसान और कुत्ते के बीच के रिश्ते को महत्व दिया जाता है।
गाय की पूजा का क्या है महत्व?
यम पंचक के दौरान गाय तिहार भी मनाया जाता है। इस दिन गाय को तिलक लगाया जाता है, फूलों की माला पहनाई जाती है और हरा चारा खिलाया जाता है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है और उसे माता लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है। नेपाल में गाय तिहार के दिन सुबह गाय की पूजा की जाती है। इसके बाद शाम को घरों में माता लक्ष्मी की पूजा होती है। लोग अपने घरों को दीपों और रोशनी से सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
यमराज पांच दिनों तक अपनी बहन यमुना के घर क्यों रहे?
यम पंचक से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। कथा के अनुसार, यमराज पांच दिनों तक अपनी बहन यमुना के घर अतिथि बनकर रहे थे। इस दौरान यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया और उनकी खूब सेवा की। यमराज अपनी बहन के प्रेम और आतिथ्य से प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान मांगने को कहा। यमुना ने अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की। इसी मान्यता से भाई टीका की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर रंग-बिरंगा तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
Yam Panchak 2026 Date: नेपाल में कब मनाया जाएगा तिहार?
नेपाल के काठमांडू महानगरपालिका के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में यम पंचक के पांच दिनों के प्रमुख आयोजन इस प्रकार हैं:
| तारीख | पर्व और परंपरा |
|---|---|
| 7 नवंबर 2026 | काग तिहार – कौओं को भोजन |
| 8 नवंबर 2026 | कुकुर तिहार और लक्ष्मी पूजा |
| 9 नवंबर 2026 | गाय तिहार – गाय की पूजा |
| 10 नवंबर 2026 | गोवर्धन पूजा, म्ह पूजा और बैल पूजा |
| 11 नवंबर 2026 | भाई टीका |
इस साल नेपाल में कुकुर तिहार और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन यानी 8 नवंबर को पड़ रहे हैं। वहीं 11 नवंबर को भाई टीका के साथ पांच दिवसीय पर्व का समापन होगा।
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यम पंचक क्यों है खास?
यम पंचक की सबसे खास बात यह है कि यह त्योहार केवल पूजा-पाठ और धन-समृद्धि तक सीमित नहीं है। इसमें कौए, कुत्ते, गाय और बैल जैसे जीवों को सम्मान दिया जाता है। इन परंपराओं के जरिए इंसान और प्रकृति के बीच के संबंध को भी महत्व मिलता है। वहीं, भाई टीका इस पर्व को पारिवारिक प्रेम और रिश्तों की मजबूती का संदेश देता है। यही वजह है कि नेपाल में तिहार को रोशनी, आस्था, जीव-जंतुओं के सम्मान और भाई-बहन के प्रेम का पर्व माना जाता है।









